भला इस संसार में ऐसा कौन होगा जो अपना भविष्य जानना न चाहता हो?

भला इस संसार में ऐसा कौन होगा जो अपना भविष्य जानना न चाहता हो । हमारे वे मित्र जो शासकीय सेवा में हैं , अक्सर अपने आगत को जानने में उत्सुक रहते हैं ।

aanand sharma
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रविवारीय गपशप

लेखक – आनंद शर्मा

भला इस संसार में ऐसा कौन होगा जो अपना भविष्य जानना न चाहता हो । हमारे वे मित्र जो शासकीय सेवा में हैं , अक्सर अपने आगत को जानने में उत्सुक रहते हैं । कई बार ऐसे मित्रों की जिज्ञासा का समाधान करने कुछ ज्योतिषी नुमा बाबा गण मिल जाते हैं जो उन्हें भविष्य के गर्भ में छिपी कुछ रहस्यात्मक गुत्थियों के बारे में फुसफुसाहट भरे स्वरों में ख़बरें देते हैं । इन बाबाओं में कुछ ऐसे भी होते हैं जो बदले में कुछ रकम पानी न मांग के एक प्रमाण पत्र चाहते हैं जिसमे अफ़सर उनके इस भविष्य द्रष्टा गुण की कुछ तारीफ़ कर दें। मैंने भी अपने सेवाकाल में ऐसे महानुभावों के दर्शन किए हैं जो मिलते ही सबसे पहले इन्ही प्रमाण पत्रों को दिखाते हैं जो आय.ए.एस. अथवा आय.पी.एस. अफसरों ने उनके गुणों की तारीफ़ करते हुए जारी किए थे । क्या जाने आम आदमी से मिलने पर वे इन्ही प्रमाणपत्रों के आधार पर आगे की कमाई भी करते होंगे ?

ऐसे ही एक सज्जन से मेरी दिलचस्प मुलाक़ात तब हुई जब मैं राजगढ़ ज़िले का कलेक्टर था । हुआ कुछ यूँ कि दोपहर के वक्त मैं दफ़्तर में कुछ खाली सा ही बैठा था तो मुझे भृत्य महोदय ने बताया कि कोई बाबा आपसे मिलना चाहते हैं । मुझे लगा कि आम आदमी की कुछ तकलीफ का मामला होगा सो मैंने तुरंत बुलाया । अंदर आते ही उन्होंने मेरे सामने अपना पिटारा खोला और बड़े अफ़सरों के जारी भाँति भाँति के प्रमाण पत्र मुझे दिखाए और फ़रमाया आप के माथे की लकीरे भी कुछ बता रही हैं , इजाजत हो तो कुछ बताएँ ?

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मैंने विनम्रतापूर्वक उनसे क्षमा मांगते हुए कहा कि अभी तो चुनाव में व्यस्त हैं आप फिर कभी आइये । पर वे तो जाने को तैयार ही न थे , पुनः थैले से निकाल कर हमारे कुछ मित्रों के भी प्रमाणपत्र दिखाए । मैंने झुँझला कर जब उन्हें द्रढ़ता से मना कर दिया और कहा अब आप चले जाओ तो वो कुछ रुवांसे हो कर जाने लगे । मुझे लगा कुछ ज्यादा ही कड़क बर्ताव हो गया तो मैंने उन्हें रोका और जेब से निकाल कर 100/- दिए और क्षमा मांगी कि बाबा जी आप अब जाओ । रुख बदला देख वे फिर चालू हो गए और कहने लगे कि बिना हाथ देखे तो पैसे लेना गुनाह हो जाएगा |

अब इस मोड़ पे आके मैंने सोचा , इसका भी दिल क्यों तोड़ो तो मैंने कहा की चलो देख लो हाथ । बाबा जी पास में कुर्सी खींच कर बैठ गए और हाथ देख कर उल्टा पलटा फिर बोले आप बड़े भाग्यशाली हो ,जल्द तरक्की होगी और इससे भी अच्छी जगह जाओगे बस जल्द किसी का विश्वास मत कर लिया करो आदि आदि । मैं सुनता रहा और जब उनका आँकलन समाप्त हुआ तो कहने लगे साहब जी आप भी एक सर्टिफिकेट बनवा दो । मैंने कहा भैय्या आपसे मैंने पहले ही कह दिया था कि ये प्रमाणपत्र मैं न दूंगा , वे कहाँ मानने वाले थे और मैं भी अपने सिद्धांत पर अड़ा था तो मैंने इसके बीच का रास्ता निकाला । मैंने कहा आपने मेरा हाथ देखा मैं आपका हाथ देख देता हूँ ।

उन्होंने अविश्वास भरी नज़रों से मुझे देखते हुए अपनी हथेली मेरी ओर बढाई और मैंने उनके जीवन के बारे में कुछ इसी प्रकार की बातें मंगल ,शुक्र ,ह्रदय रेखा , भाग्य रेखा आदि को बताते हुए कीं | बातें करते करते मैंने जब उनसे कहा कि आपके जीवन में भी बदलाव आने वाला है और आने वाले समय में आप कुछ ऐसा पद प्राप्त करेंगे जिससे आपका मान बढ़ेगा तो वे एकदम से खुल गए । कहने लगे साहब आप सही कह रहे हो मेरी जात वाले मुझे इस बार सरपंच का चुनाव लड़ाना चाह रहे हैं और मेरे समाज के वोटों को देख के लगता है कि यदि मैंने ढंग से चुनाव लड़ लिया तो मैं सरपंच बन सकता हूँ | तीर एकदम निशाने पर लगा । दरअसल पढने लिखने की आदत के कारण हस्त रेखा विज्ञान की कुछ किताबे भी मैंने पढ़ी हैं और इस सामुद्रिक ज्ञान का उपयोग फुर्सत के क्षणों में मैंने बाबाजी के साथ कर लिया । बाबाजी तो एकदम फ़िदा थे , मैंने मजाक में कहा बाबाजी अब तो आप मुझे प्रमाण पत्र दे दो ।