ग्रामीणों ने निभाया भाई का फर्ज, शहीद की पत्नी को दिया ‘आशियाने’ का तोहफा

मोहन सिंह बीएसएफ में थे और 31 दिसंबर 1992 को असम में तैनाती के दौरान वे शहीद हो गए थे।

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इंदौर: 27 साल से अपने दो बेटों के साथ झोपडी में मुफलिसी की जिंदगी जी रहे एक शहीद के परिवार को गांव के लोगों ने 27 साल बाद सम्मान लौटाया। गांव के युवाओं ने “वन चेक-वन साइन” अभियान चलाकर एक साल के अंदर 11 लाख रुपए इकट्ठा कर शहीद परिवार के लिए खूबसूरत पक्का मकान बना डाला। 15 अगस्त को राखी के मौके पर पूरे गांव ने शहीद की पत्नी से राखी बंधवा कर नए आशियाने का तोहफा भेंट किया।

इंदौर जिले के बेटमा के पीरपीपल्या के नौजवानों ने एक ऐसी पहल की है जो देश ही नहीं दुनिया के लिए एक मिसाल कायम करेगी। दरअसल इस गांव में वीर शहीद मोहन सिंह का परिवार एक झोपडी में रह रहा था। यह परिवार मोहन सिंह के शहीद के बाद झोपडी में रहते हुए मजदूरी कर अपना पेट पाल रहा था। मोहन सिंह बीएसएफ में थे और 31 दिसंबर 1992 को असम में तैनाती के दौरान वे शहीद हो गए थे। मोहन सिंह जब शहीद हुए तब एक साल का बेटा औऱ 4 महीने का गर्भ था। दोनों बेटो की परवरिश करते हुए जिंदगी के 27 साल एक झोपडी में ही काटना पडे।

पत्नी और परिवार को आज तक शहीद परिवार होने के नाते किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला था। गांव के नौजवानों को जब यह बात पता चली तो बीते साल शहीद की पत्नी से राखी बंधवाने के बाद संकल्प लिया था कि अगले साल वे अपनी इस बहन के लिए ऐसा तोहफा देंगे जिससे उनके जीवन में रोशनी आ जाएगी। नौजवानों ने “वन चेक, वन साइन” अभियान चलाकर 11 लाख रुपये इकट्ठा किए। 10 लाख रुपए में परिवार के लिए खुबसूरत मकान तैयार करवा दिया। अब रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस एक ही दिन आ रहा है ऐसे में युवाओं की यह पहल और भी प्रासंगिक हो गई है। गांव के युवाओं ने 15 अगस्त को शहीद की पत्नी और अपनी इस बहन से राखी बंधवा कर उसे नए आशियाने की चाबी सौंपी।

गांव के लोग बचे हुए एक लाख रुपए से मोहन सिंह की प्रतिमा बनवा कर गांव के प्रमुख चौराहे पर लगाएंगे।

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