राज-काज : दाद देने लायक शराबबंदी पर उमा की हुंकार

भाजपा नेत्री साध्वी उमा भारती शराबबंदी को लेकर फिर चर्चा में हैं। अपनी ही भाजपा सरकार की शराब नीति पर फिर उन्होंने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ‘मैं मध्यप्रदेश की महिलाओं व बेटियों के साथ हूं।

दिनेश निगम ‘त्यागी’

भाजपा नेत्री साध्वी उमा भारती शराबबंदी को लेकर फिर चर्चा में हैं। अपनी ही भाजपा सरकार की शराब नीति पर फिर उन्होंने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ‘मैं मध्यप्रदेश की महिलाओं व बेटियों के साथ हूं। शराबखोरी के शिकार हो रहे बेटों के लिए भी चिंतित हूं। उनकी इज्जत व जान पर खेलकर हम राजस्व कमा रहे हैं, इस पर शमिंर्दा भी हूं।’ वे यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने कहा कि ‘शनिवार से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रही हैं और शुक्रवार को हमने मध्यप्रदेश में नई शराब नीति लागू की है। इसमें लोगों को ज्यादा शराब कैसे पिलाई जा सके, अहातों में ज्यादा शराब कैसे परोसी जा सके, इस व्यवस्था को निश्चित किया गया है।

इसका विरोध किया जा रहा है।’ उन्होंने लिखा कि ‘छत्तीसगढ़ व दिल्ली की शराब नीति के विरोध में भाजपा की राज्य इकाइयां सड़क पर उतर आई हैं।’ नरेंद्र मोदी और अमित शाह के जमाने की भाजपा में पार्टी के अंदर रहकर अपनी ही सरकार की नीतियों के खिलाफ इससे ज्यादा क्या बोला जा सकता है। इससे पहले वे शराब की दुकान पर जाकर पत्थर फेंक चुकी हैं। पत्थर फेंकने के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में शराब की दुकानों के सामने प्रदर्शन होने लगे हैं। इसलिए उमा की मंशा पर सवाल उठाने की बजाय इस हुंकार के लिए उन्हें दाद देनी चाहिए।

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पीछा छोड़ने तैयार नहीं ‘व्यापम’ का जिन्न

व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) के अब तक दो बार नाम बदले जा चुके हैं। बावजूद इसके ‘व्यापम’ नाम का यह जिन्न भाजपा सरकार का पीछा छोड़ने तैयार नहीं है। व्यापम घोटाला सरकार का तो कुछ नहीं बिगाड़ सका, लेकिन बहुत सारे नेताओं, अफसरों, युवाओं का भविष्य लील चुका हैं। एक संभावना वाले मंत्री जेल के बाद इस दुनिया से ही उठ गए। व्यापम की छाया से उबरने के लिए इसका नाम दो बार बदला जा चुका है। पहले प्रोफेसनल एक्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) नाम रखा गया और अब यह कर्मचारी चयन आयोग के नाम से जाना जा रहा है।

व्यापम का नाम बदलने के बाद इस संस्था ने ज्यादा परीक्षाएं आयोजित नहीं कीं लेकिन जो भी हुईं, सभी विवादित रहीं। फिर एक परीक्षा विवादों में है। आरोप है कि पेपर का स्क्रीनशॉट पहले से ही बाहर था। बाद में कहा गया कि पेपर लीक करने में एक मंत्री के बेटे का कॉलेज शामिल है। हालांकि इस मसले पर मंत्री ने सफाई में कहा कि हमने पूरी बिल्डिंग किराए पर दे रखी है। किराएदार क्या करता है, इसके लिए हम जवाबदार नहीं हैं। सरकार भी कह रही है कि कोई घोटाला नहीं हुआ। लेकिन कांग्रेस को तो मुद्दा मिल गया और व्यापम का यह जिन्न एक बार फिर सरकार को परेशान करने बाहर है।

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गृह-नक्षत्र के चक्कर में बुंदेलखंड के ये दिग्गज

प्रदेश के बुंंदेलखंड अंचल के कई दिग्गज नेता गृह-नक्षत्रों के शिकार होते नजर आ रहे हैं। यह बात अलग है कि सभी अपने कौशल से बच निकलने में कामयाब हैें। पहले बात केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की, वे दमोह से सांसद हैं। कुछ दिन पहले उनके विधायक भाई की बहू ने गंभीर आरोप लगाकर तहलका मचा दिया था। इसके बाद बारी आई भाजपा के दिग्गज नेता एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव की। भार्गव का साढ़ू कन्यादान योजना की राशि के गवन में फंस गया। सागर के ही एक अन्य दिग्गज प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ एक पत्रकार सोशल मीडिया में लगातार वीडियो वायरल कर उसे और उसके परिवार को बर्बाद करने के आरोप मंत्री जी पर लगा रहा है।

सागर के ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खास प्रदेश के राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत भी गृह-नक्षत्र के फेर मे हैं। उनके बेटे के कालेज पर पेपर लीक करने का आरोप लग गया। इससे पहले पन्ना से विधायक एवं खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह पर कई बार अवैध रेत खनन कराने के आरोप लग चुके हैं। साफ है कि बुंदेलखंड के नेताओं पर कोई वक्र दृष्टि है। हालांकि सभी अपने कौशल एवं पौरुष के बूते पाक साफ बने हुए हैं। कोई शक्ति इन्हें बुरी नजर से बचाए हुए है।

हैरान करने वाली कमलनाथ की यह शिरकत

देश के लोगों की कमर तोड़ रही जिस महंगाई के खिलाफ 31 मार्च को कांग्रेस पूरे देश में हल्ला बोल रही थी, मप्र कांग्रेस भी सड़क पर उतरी। दिल्ली के इस प्रदर्शन में अन्य नेताओं के साथ राहुल गांधी ने भी हिस्सा लिया। भोपाल में हुए आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ शामिल हुए। आप जानकार हैरान हो जाएंगे, कमलनाथ 7 मिनट 12 सेकेंड के लिए ही प्रदर्शन स्थल पर आए। गैस सिलेंडर को माला पहनाई और दो शब्द बोलकर चलते बने। जिस नेता के कंधों पर संगठन के साथ विधानसभा में विधायक दल के नेता का भी दायित्व है, क्या वह इस तरह की हिस्सेदारी से संगठन को मजबूत कर भाजपा का मुकाबला कर सकता है।

बिल्कुल नहीं, साफ है कि मप्र में कांग्रेस सिर्फ और सिर्फ एंटी इंकम्बेंसी के सहारे है। इसके बावजूद उनका कथन पर गौर फरमाईए, उन्होंने कहा है कि मैंने कभी पद के लिए आवेदन नहीं किया था। जब कहा जाएगा, पद छोड़ दूंगा। उनके इस कथन के बाद फिर कमलनाथ के एक पद छोड़ने की चर्चा चल पड़ी है। हालांकि खबर है कि दबाव बढ़ा तो कमलनाथ नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ सकते हैं और संगठन प्रमुख का पद अपने पास ही रखना चाहेंगे। बहरहाल दोनों पदों के लिए कांग्रेस में दावेदारों ने सक्रियता बढ़ा दी है।

आम आदमी पार्टी की धमक से पैदा दहशत

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के बाद एक और राज्य पंजाब में अपनी धमक दिखाई है। वह भी ऐसी कि देश के जिस हिस्से में भी एक-दो साल के अंदर चुनाव होना है वहां राजनीतिक दहशत का माहौल है। कह सकते हैं कि ऐसी दहशत कुछ वर्षो से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं अमित शाह के कारण भाजपा की है। पर ‘आप’ के केजरीवाल इनसे भी आगे निकले। उन्होंने मोदी-शाह की जोड़ी को भी दहशत में डाल दिया। इसका असर मप्र में भी है। यह ठीक है कि मप्र विधानसभा के चुनाव अगले साल के अंत में होना है और केजरीवाल के पास दिल्ली के बाद पंजाब जैसा कोई चेहरा मप्र में नहीं है।

बावजूद इसके आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस और भाजपा दोनों की नींद छीन ली है। भाजपा की नींद इसलिए उड़ी है क्योंकि मोदी-शाह जैसी जोड़ी केजरीवाल का न दिल्ली में कुछ बिगाड़ पाई और न ही पंजाब में। पंजाब में भी हर दल का हर दिग्गज आप के उम्मीदवारों के सामने चारों खाने चित्त हो गया। मुख्यमंत्री चन्नी को तो एक मोबाइल रिपेयर करने वाले ने हरा दिया। कांग्रेस की नींद उड़ना इसलिए स्वाभाविक है क्योंकि आम आदमी पार्टी भाजपा से ज्यादा कांग्रेस का वोट छीन रही है। मप्र में ‘आप’ कुछ कर पाएगी, फिलहाल ऐसा नहीं लगता लेकिन उसने दहशत जरूर पैदा कर दी है।