प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई तमाम नेताओं के ट्वीटर ने अकाउंट पर ऑफिसियल लेबल जोड़ दिया था। इसके कुछ ही देर बार यह लेबल हटा दिया गया है। लेकिन इस फीचर को लेकर अभी तक ट्वीटर की ओर से कोई प्रतिक्रिया नही दी गई है। यह माना जा सकता है कि ट्विटर ब्लू अकाउंट और वेरिफाइड अकाउंट के बीच अंतर किया जा सके।

इनके अकाउंट पर लिखा था ऑफिसियल

ट्विटर ने पीएम और गृहमंत्री के अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, सचिन तेंडुलकर के ट्विटर हैंडल पर भी लेबल जोड़ दिया था।

ये बात कही मस्क ने

ट्विटर के ब्लू टिक सब्सक्रिप्शन के बाद कंपनी इस ग्रे लेबल को टेस्ट कर रही है। इसको लेकर पुरानी रिपोर्ट्स में बताया गया है कि जिनलोगों के पास पहले से वेरीफाइड अकाउंट्स हैं, केवल उनके लिए ही ग्रे कलर में ऑफिशियल का टैग आएगा।

ट्विटर का ये फीचर फिलहाल टेस्टिंग स्टेज में है। टेस्टिंग के दौरान कई अकाउंट्स में ये टैग देखने को मिला, लेकिन अब इस टैग को हटा लिया गया है। अब किसी भी अकाउंट के नीचे ऑफिशियल लिखा नहीं आ रहा है। एलॉन मस्क ने एक ट्वीट के रिप्लाई में बताया है कि इस टैग को उन्होंने बंद कर दिया है। ब्लू टिक को ही उन्होंने ज्यादा अच्छा बताया है।

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इसलिए दिया जा रहा है Official लेबल

ट्विटर की अधिकारी एस्थर क्रॉफर्ड ने ट्वीट किया- ‘बहुत से लोगों ने पूछा है कि आप ब्लू चेकमार्क वाले Twitter Blue सब्सक्राइबर्स और Official के रूप में वैरिफाइड अकाउंड के बीच अंतर कैसे कर पाएंगे? यही वजह है कि हम ‘Official’ की शुरुआत कर रहे हैं।

उन्होंने आगे बताया कि पहले से वैरिफाइड सभी अकाउंट्स को ‘Official’ लेबल नहीं मिलेगा. लेबल को खरीदा भी नहीं जा सकेगा. जिन अकाउंट्स को यह लेबल मिलेगा, उनमें सरकारी खाते, कॉमर्शियल कंपनियां, बिजनेस पार्टनर, प्रमुख मीडिया आउटलेट, पब्लिशर्स और कुछ हस्तियां शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि New Twitter Blue में आईडी वैरिफिकेशन शामिल नहीं है। यह एक पेड सब्सक्रिप्शन है, जो ब्लू चेकमार्क और चुनिंदा सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करती है। हम अकाउंट्स के टाइप के बीच अंतर करने के तरीकों पर प्रयोग करना जारी रखेंगे।

इतने देने होगे रूपए

ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क ने पिछले दिनों कहा था कि ब्लू टिक के लिए आपको पैसा देना होगा। वैरिफाइड अकाउंट्स के लिए यूजर को अब हर महीने 8 डॉलर यानी कि करीब 660 रुपये देने होंगे। हालांकि इस फैसले का विरोध भी हुआ लेकिन मस्क ने कह दिया है शिकायत करते रहिए जेब तो ढीली करनी ही पड़ेगी।