आज है पौष कृष्ण द्वितीया तिथि, इन बातों का रखें ध्यान

विजय अड़ीचवाल

आज मङ्गलवार, पौष कृष्ण द्वितीया तिथि है।
आज पुनर्वसु नक्षत्र, “आनन्द” नाम संवत् 2078 है
( उक्त जानकारी उज्जैन के पञ्चाङ्गों के अनुसार है)

-मृत्यु तिथि से ठीक 20 वें दिन पहला श्राद्ध होता है। एक वर्ष में 16 बार श्राद्ध किया जाता है।
-द्वादशा के बाद यदि एक वर्ष में चूड़ाकरण, यज्ञोपवीत, विवाह, तथा जन्म आदि किन्हीं माङ्गलिक कार्यों की संभावना हो तो अपकर्षण ( बरसी) करने का भी विधान है।
-बरसी मृत्यु तिथि वाले मासिक श्राद्धों पर करना उत्तम माना गया है।
-यदि द्वादशा के तत्काल बाद उत्तम षोडशी का अपकर्षण यानि बरसी करना चाहे तो उन्हें एक साथ 16 पिण्ड दान करना चाहिए।
-जिस वर्ष अधिकमास हो, उस वर्ष 17 पिण्ड करने की विधि है।
-2 वर्ष पश्चात जब भी पितृपक्ष (आश्विन मास) आता है, उस समय श्राद्ध में मिलाया जाता है।
-इसके बाद मृत्यु तिथि और पितृपक्ष की तिथि पर ही श्राद्ध करना चाहिए।
-यदि सौभाग्यवती स्त्री का श्राद्ध हो तो ब्राह्मण और अतिरिक्त सौभाग्यवती ब्राह्मणी को भी भोजन कराना चाहिए। (मार्कण्डेय वचन)
-श्राद्ध वाले दिन रक्षा सूक्त या पुरुष सूक्त या पितृसूक्त या रुचि स्तव का पाठ करने का विशेष महत्त्व है।