ISRO के वो कारनामे, जिससे हैरत में पड़ी पूरी दुनिया

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नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अंतरिक्ष में एक और नया कीर्तिमान रचने जा रहा है। चंद्रयान 2 के लॉन्च का काउंटडाउन शुरू हो गया है। इसरो आज दुनियाभर की सबसे भरोसेमंद स्पेस एजेंसी है। दुनियाभर के करीब 32 देश इसरो के रॉकेट से अपने उपग्रहों को लॉन्च कराते हैं। 16 फरवरी 1962 को डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. रामानाथन ने इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च (INCOSPAR) का गठन किया था। आज हम आपको इसरो के उन क़दमों के बारे में बता रहे है, जिसने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया था।

सर्जिकल स्ट्राइक और एयरस्ट्राइक

पाकिस्तान द्वारा देश में बार-बार आतंकी हमले के बाद सेना ने करारा जवाब दिया है। उरी हमले के बाद पाकिस्तान में हुई सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा आतंकी हमले के बाद बालाकोट में हुई एयरस्ट्राइक के दौरान सेना ने इसरो की मदद ली। इसरो के उपग्रहों की मदद से ही आतंकियों के ठिकानों का पता किया गया। साथ ही लाइव तस्वीरें मंगाई गई।

Chandrayaan-2 का लैंडर-रोवर

नवंबर 2007 में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने इसरो को चंद्रयान-2 को लैंडर देने की बात कही थी। 2008 में इस मिशन को सरकार से अनुमति मिली और 2009 में चंद्रयान-2 का डिजाइन तैयार कर लिया गया। जनवरी 2013 में चन्द्रयान -2 की लॉन्चिंग तय थी लेकिन रूस लैंडर नहीं दे पाया। इसके बाद इसरो वैज्ञानिकों ने बिना किसी विदेशी मदद के खुद की टेक्नोलॉजी विकसित करके लैंडर और रोवर बनाया।

एकसाथ 104 उपग्रह छोड़कर बनाया रिकॉर्ड

15 फरवरी 2017 को इसरो ने पीएसएलवी-सी37 रॉकेट से कार्टोसैट-2 अहित 104 उपग्रहों को एकसाथ लॉन्च कर पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया।

मंगल मिशन

5 नवंबर 2013 को इसरो ने मार्स ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान) लॉन्च किया। दुनिया में भारत इकलौता देश और इसरो पहली अंतरिक्ष एजेंसी है जिसने पहली बार में ही मंगल पर विजय हासिल की।

चांद पर मौजूद है नी

22 अक्टूबर 2008 को इसरो ने पीएसएलवी रॉकेट से भारत के पहले मून मिशन चंद्रयान-1 को लॉन्च किया। यह 312 दिनों तक इसरो को चांद से डाटा और तस्वीरें भेजता रहा। इसरो के ही इस मिशन ने पूरी दुनिया को बताया कि चांद पर पानी मौजूद है।

भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी का विकास किया गया

15 अक्टूबर 1994 को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) रॉकेट ने आईआरएस-पी2 को सफलतापूर्वक उसकी तय कक्षा में तैनात किया। इसके बाद से पीएसएलवी देश का सबसे भरोसेमंद रॉकेट बन गया. 2001 में जियोसिंक्रोनस सैटेलाइच लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) रॉकेट से जीसैट-1 उपग्रह लॉन्च किया गया।

राकेश शर्मा

राकेश शर्मा अन्तरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने थे। 2 अप्रैल 1984 में सोवियत यूनियन के रॉकेट से राकेश शर्मा अंतरिक्ष में गए थे और पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए। 1988 को देश का पहला रिमोट सेंसिंग रॉकेट आईआरएस-1ए छोड़ा गया।

देश का पहला लॉन्च व्हीकल

7 जून 1979 को इसरो ने पहला अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट भास्कर-1 छोड़ा। 18 जुलाई 1980 को रोहिणी उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया गया। इसके लिए भारत रत्न, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने पहला लॉन्च व्हीकल बनाया था।

इनसैट-1ए

इसरो ने 10 अप्रैल 1982 को देश का पहला इनसैट-1ए लॉन्च किया। यह देश के कम्युनिकेशन, ब्रॉडकास्टिंग और मौसम संबंधी भविष्यवाणी के लिए मददगार साबित हुआ।

टीवी और फोन के लिए बड़े प्रयोग

1975 से 76 के बीच इसरो ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ मिलकर सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरीमेंट (SITE) शुरू किया। इसका मकसद था देश के 2400 गांवों को टीवी पर कार्यक्रम दिखाकर जागरूक करना। 1977 में संचार प्रणाली दुरुस्त करने के लिए सैटेलाइट टेलिकम्युनिकेशन एक्सपेरिमेंट्स प्रोजेक्ट (STEP) शुरू किया गया।

पहला उपग्रहअंतरिक्ष में लॉन्च

19 अप्रैल 1975 को सोवियत यूनियन ने देश का पहला उपग्रह आर्यभट्ट लॉन्च किया लेकिन इसरो के लिए ये एक सीखने की बड़ी प्रक्रिया और सफलता थी।

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