मकर संक्रांति में जयपुर की पतंगबाजी देश भर में मशहूर है यहां गोविंद देव जी मंदिर में एक पुरानी परंपरा है जिसमे पहले जयपुर के इस प्रसिद्ध मंदिर में बड़े मनुहार के साथ प्रभु को पतंगबाजी का निमंत्रण दिया जाता है देखिये भक्तों का एक मनुहार भरा आनन्द से भरपूर ये वीडियो वैसे तो विभिन्न योग संयोगों मे
परसो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 8.05 से शाम 5.50 बजे तक ही है15 को दिनभर पतंगें कुलांचे भरेंगी, दिनभर चरखियां घूमेंगी, डोर आसमान नापेगी. राधे-रानी चांदी की चरखी पकड़े हैं और ठाकुरजी सोने की पतंग उड़ा रहे हैं. उमंग-उत्साह के बीच शहरवासी दिनभर छतों पर रहेंगे. दिनभर दानपुण्य का दौर चलेगा.

भगवान सूर्य की आराधना का पर्व है संक्रांति

बहरहाल, शास्त्रानुसार यह पर्व भगवान सूर्य की आराधना का पर्व है. इस दिन पवित्र तीर्थों में स्नान और दान का काफी महत्व है. नक्षत्रनाम मन्दा होने से इस माह में वैज्ञानिकों और विद्वज्जनों का रचनात्मक कार्यों में मन लगा रहेगा. संक्रांति प्रवेश के समय बालव करण रहेगा, जिससे इसका वाहन बाघ व उपवाहन घोड़ा बनेगा. भूतजाति की यह संक्रांति शरीर पर कुंकुम का लेप लगाकर पीले रंग के वस्त्र एवं चमेली के पुष्प की माला धारण करके हाथ में गदा शस्त्र लेकर चांदी के बर्तन में खीर का भोजन करती हुई बैठी हुई स्थिति में कुमारी अवस्था में दिन के द्वितीय भाग में प्रवेश कर रही है.