सुप्रीम कोर्ट पहुंची नागरिकता संशोधन कानून की लड़ाई, 12 याचिकाएं दाखिल

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Suprime Court

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जारी अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश और तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने नागरिकता संशोधन बिल को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। शुक्रवार को इन दोनों के अलावा भी कई याचिकाएं दायर की गई है। करीब आधा दर्जन याचिकाओं में इस कानून को असंवैधानिक बताया गया है और इसे रद्द करने की मांग की गई है।

जयराम रमेश की याचिका में नागरिकता संशोधन कानून 2019 को समानता के अधिकार के खिलाफ बताया गया है और इसे रद्द घोषित करने की अपील की गई है। साथ ही इस कानून को 1985 के असम समझौते के खिलाफ घोषित करने की भी बात कही गई है।याचिका में कहा गया है कि यी कानून सर्वोच्च अदालत के सरबानंद सोनोवाल में दिये गए निर्णय का भी उल्लंघन करता है ऐसे में इसे रद्द किया जाए।

बता दे कि जयराम की यह याचिका कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील कपिल सिब्बल द्वारा तैयार की गई है। याचिका में कहा गया, नागरिकता संशोधन कानून संविधान में दिए गए समानता (अनुच्छेद 14) और जीवन (अनुच्छेद 21) के अधिकारों का सीधे तौर पर उल्लंघन करता है। इस कानून को बनाने में संयुक्त संसदीय समिति की 7 जनवरी 2019 की रिपोर्ट की अनदेखी की गई है।

बता दे कि कांग्रेस के अलावा, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, पीस पार्टी, रिहाई मंच औऱ सिटिजन अगेंस्ट हेट, एहतेशम हाशमी, प्रद्योत देब बर्मन, जन अधिकारी पार्टी के महासचिव फैजउद्दीन, पूर्व उच्चायुक्त देब मुखर्जी, वकील एमएल शर्मा, सिम्बोसिस लॉ स्कूल से लॉ स्टूडेंट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस कानून के खिलाफ याचिका दायर की गई है।

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