युवाओं में इस वजह से बढ़ रहा आर्थराइटिस का खतरा, ये है कारण

आज कल का युवा खाने पीने पर ध्यान नहीं देता जिसकी वजह से कई बीमारिया उन्हें घेर लेती है। वैसे तो आज कल का खान पान पूरी तरह से बदल चूका है। जिसकी वजह से भी बिमारियों का खतरा बढ़ता ही जा रहा है।

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आज कल का युवा खाने पीने पर ध्यान नहीं देता जिसकी वजह से कई बीमारिया उन्हें घेर लेती है। वैसे तो आज कल का खान पान पूरी तरह से बदल चूका है। जिसकी वजह से भी बिमारियों का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे आज हम आपको ऐसी कई बिमारियों के बारे में बताने जा रहे है जो युवाओं में लगातार बढ़ती जा रही है। दरअसल, एक विशेषज्ञ ने बताया कि हमारे देश में हर छह में से एक व्यक्ति आर्थराइटिस से पीड़ित है और चिंता की बात यह है कि युवाओं में इसके मामले बढ़ रहे हैं।

खास कर ऑस्टियोआर्थराइटिस के मामलों में इन दिनों जीवन शैली की वजह से वृद्धि दिखाई दे रही है। वैसे तो ये बीमारी ज्यादा उम्र के लोगों में होती है ऐसा सुना है लेकिन अब ये नई पीढ़ी में भी लगातार बढ़ गई है और उम्र के साथ साथ इसका खतरा और भी बढ़ जाता है।

वहीं डॉ ने बताया कि ज्यादा देर तक बैठ कर काम करना, कम से कम चलना, मोटापा, जंक फूड का सेवन और विटामिन डी की कमी आर्थराइटिस का मुख्य कारण होते हैं। ये कारण आधुनिक जीवन शैली की ही देन हैं। बता दे, घुटने के आर्थराइटिस के मामले आम हैं और इसकी वजह से व्यक्ति को चलने फिरने में बहुत ज्यादा तकलीफ होती है।आर्थराइटिस तब होता है जब यह उपास्थि घिसने लगती है और इसकी तन्यता अर्थात लचीलापन कम होने लगता है। ऐसे में हड्डियों के घषर्ण की वजह से गहरा दर्द होता है।

इसे रोकने के लिए संयंमित खानपान, शारीरिक सक्रियता, व्यायाम अदि पर ध्यान देना चाहिए। वजन कम होने से जोड़ों पर दबाव भी कम पड़ता है। इसके अलावा, विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में शरीर को मिलना चाहिए. व्यायाम करते समय ध्यान रखना चाहिए कि यह भी संतुलित हो। जरूरत से अधिक व्यायाम करने से जोड़ों पर फिर दबाव पड़ेगा और तकलीफ होगी तथा कार्टिलेज का क्षरण बढ़ेगा। व्यायाम हर दिन हो लेकिन संतुलित होना चाहिए।

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