विपिन नीमा, इंदौर। प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख वाहनों का बोझ झेलने वाला 72 साल पुराना शास्त्री ब्रिज को तोड़कर नया बनाने की चर्चा शुरू हो चुकी है। शास्त्री ब्रिज कभी आराम नही करता। हमेशा वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। अधिकारियों ने कागजों पर ब्रिज को नया बनाने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है, लेकिन ब्रिज को तोड़कर नया बनाना कोई आसान काम नही है। ब्रिज को लेकर कुछ विशेषज्ञों से भी मार्गदर्शन लिया जा रहा है। उधर इंदौर के सीनियर कंसल्टेंट अतुल शेठ का कहना है कि ब्रिज को लेकर जो भी निर्णय हो वो बंद कमरे न होकर खुले में जनता के बीच हो। अगर ब्रिज को तोड़ा गया तो कम से कम तीन दो से साल तक शहर की जनता को परेशानी भोगना पड़ेगी।

शास्त्री ब्रिज को तोड़ने का फैसला सोच समझकर ले

रेलवे स्टेशन की समग्र विकास योजना में सालो पुराना शास्त्री ब्रिज बड़ा अवरोध बन रहा है। साथ ही निकट भविष्य में मेट्रो स्टेशन भी बनाना प्रस्तावित है, ऐसे में शास्त्री ब्रिज के अवरोध को कैसे दूर किया जाए । इन सारे मुद्दों पर सासंद , रेलवे , निगम ओर मेट्रो के अफसरों की एक बैठक हो चुकी है। बताया गया है कि दो तीन दिनों में स्थानीय अधिकारी ब्रिज का दौरा करके स्थिति को देखेंगे। अधिकारियों ने बताया ब्रिज को तोड़ने से पहले हर पहलुओं को देखा जाएगा। इसमे जल्दबाजी नहीं कि जाएगी। सोच – समझकर ही निर्णय लिया जाएगा।

पुल नया बनाया तो कई दिक्कते सामने आएगी

शहर के वरिष्ठ कंसल्टेंट अतुल शेठ का कहना है कि शास्त्री ब्रिज को तोड़कर नया बनाया जाता है तो, इसकी ऊंचाई बढ़ने से पुल की दोनो तरफ की भुजाएं हाई कोर्ट तक और जिला कोर्ट तक हो जाएगी। इससे काफी दिक्कतें शहर को होगी। आरएनटी मार्ग और शास्त्री मार्केट की तरफ जाने वाले ट्राफिक का कैसे क्या होगा प्रबंधन? और निर्माण के दौरान 2 साल तक शहर को अकल्पनीय कष्ट ओर तकलीफ होगी । मेरा मानना है कि , फिल्म कॉलोनी से वही गांधी प्रतिमा है उसके पहले मेट्रो, अहिल्या लाइब्रेरी के बगीचे से होते हुए शास्त्री ब्रिज के पास से , शास्त्री मार्केट और इंदौर प्रीमियर को-ऑपरेटिव बैंक के मध्य से होते हुए, मेहतानी मार्केट से छोगालाल उस्ताद मार्ग होते हुए, मेट्रो सीधे खातीपूरा होते हुए कृष्णपुरा पुल पर निकल सकती है। उन्होंने कहा कि ब्रिज को लेकर जो भी निर्णय लेना है वो बंद कमरे न ओपन फ्लेटफार्म पर लिया जाए, क्योकि ये शहर के लिए सबसे महत्वपूर्ण ब्रिज है।

न पुल तोड़ने की जरूरत पड़ेगी न सड़क खोदना पड़ेगी

उन्होंने बताया इस तरह के रूट्स से हमें शास्त्री ब्रिज को न तोड़ने की आवश्यकता पड़ेगी, ना कृष्णपूरा पुल से लेकर गांधी हॉल तक एमजी रोड को और शहर को खोदने की परेशानी की आवश्यकता भी नही पड़ेगी। और इस निर्माण में यातायात प्रबंधन भी बहुत अच्छा हो पाएगा, जिसमें आम नागरिकों को कठिनाइयां कम से कम होगी। ब्रिज तोड़ने के बाद परेशानियां इतनी बढ़ जाएगी पूरी ट्रैफिक व्यवस्था अस्त – व्यस्त हो जाएगी।

ब्रिज पर प्रतिदिन रहती है 2 लाख वाहनों की आवाजाही

शास्त्री ब्रिज शहर का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त ब्रिज है। तीन भुजाओं वाला यह ब्रिज कभी आराम नही करता।24 ही घंटे ट्रैफिक का मूवमेंट बना रहता है। पूर्व में आईडीए द्वारा ब्रिज के ट्रैफिक को लेकर कराए गए फिजिबिलिटी सर्वे के मुताबिक शास्त्री ब्रिज से प्रतिदिन 24 ही घंटे लगभग 2 लाख वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। सर्वे में
दिल्ली से आये विशेषज्ञों के एक दल इंदौर में तीन दिन रहकर शास्त्री पूरी टाइमिंग के साथ ब्रिज की ट्रैफिक व्यवस्था , वाहनों का आवागमन, पिकओवर्स में ब्रिज पर वाहनों की स्थिति , वाहनों का जाम आदि बिंदुओं पर परीक्षण किया था।

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100 दिनों में ही तैयार हो गया था जवाहर मार्ग ब्रिज

ब्रिज तोड़कर नया बनाने का ताजा उदाहरण जवाहर मार्ग ब्रिज है। तत्कालीन निगम कमिश्नर आशीष सिंह ने 100 दिनों में ब्रिज तैयार करने का लक्ष्य रखा था। नगर निगम ने निर्धारित समय मे नया ब्रिज खड़ा कर दिया। हालांकि जवाहर मार्ग ब्रिज बंद होने से जवाहर मार्ग के ट्रैफिक लोड एमजी रोड पर आ गया और ऐसी ही व्यवस्था के बीच एमजी रोड का ट्रैफिक चलता रहा। ये बात सही है कि शास्त्री ब्रिज ओर जवाहर मार्ग ब्रिज की तुलना आपस मे नही की जा सकती है। शास्त्री ब्रिज काफी बड़ा है। जो पूरे शहर के ट्रैफिक का बोझ उठा रहा है।