भारत में हाल ही में संसद की स्टैंडिंग कमेटी ने सिंगल यूज सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। इस कमेटी का तर्क है कि इससे तंबाकू नियंत्रण अभियान प्रभावित हो रहा है। कमेटी ने सिफारिश में आगे कहा है कि देश में एयरपोर्ट के स्मोकिंग जोन को भी बंद कर देना चाहिए।

बता दें भारत में हर साल सिगरेट पीने के असर से 3.5 लाख लोगों की मौत होती है। अमेरिका में यह संख्या 4.8 लाख के आसपास है। सिगरेट का निकोटिन सबसे ज्यादा शरीर को नुकसान पहुंचाता है। स्थायी समिति की रिपोर्ट पर केंद्र सरकार सिंगल सिगरेट की बिक्री और उत्पात पर रोक लगा सकती है।

कैसे काम करती है स्थायी समिति

संसद के कामकाज को सुगम बनाने के लिए दो प्रकार की समितियों का गठन किया जाता है। पहला स्थायी और दूसरा तदर्थ। स्थायी समिति में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद होते हैं, जिनका कार्यकाल 1 वर्ष का होता है। समिति काम की सुविधा के लिए सरकार को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करती है। बता दें 3 साल पहले केंद्र सरकार ने हेल्थ मिनिस्ट्री की सिफारिश पर ई-सिगरेट पर बैन लगाया था। तब इसे बेचने के खिलाफ कानून भी बनाया था। समिति ने IARC रिपोर्ट का हवाला दिया। इसके अनुसार शराब और तंबाकू के सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

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भारत में कितना लगता तम्बाकू पर टैक्स

भारत में जीएसटी के लागू होने के बाद, बीड़ी पर 22 प्रतिशत, सिगरेट पर 53 प्रतिशत और धूम्रपान रहित तंबाकू पर 64 प्रतिशत कर लगाया गया। इसके साथ ही WHO ने भारत सरकार से तंबाकू उत्पादों पर 75 फीसदी टैक्स लगाने को कहा। हर साल 3.5 लाख लोगों की मौत धूम्रपान के प्रभाव से होती है। अमेरिका में यह संख्या करीब 4.8 लाख है। सिगरेट से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण निकोटीन का ओवरडोज है। सरकार ने इसे रोकने की कई बार कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली।