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साहब को तो नमस्ते पसंद होती है, मुकेश नेमा की टिप्पणी

Posted on: 11 May 2018 06:08 by Ravindra Singh Rana
साहब को तो नमस्ते पसंद होती है, मुकेश नेमा की टिप्पणी

होता होगा बेबी को बेस पसंद! साहब को तो नमस्ते पसंद होती है , जितनी ज्यादा नमस्ते ,उतना बडा साहब ! पब्लिक उसको उसे मिलने वाली नमस्ते से तौलती है और वह बहुत भारी होने की मनोकामना लिये ही जीता है! हर साहब यह चाहता है कि उसे भरपूर नमस्ते मिलें और हर नमस्ते उससे भी ज्यादा वज़नदार हों पर ये मक्कार दुनिया ऐसा करती नही ,वह बचती है साहबों से नमस्ते करने मे और मजबूरी मे करना ही पड़े तो बहुत नाप तौल कर नमस्ते करती है ,पर पुराने हो चुके साहब ऐसी मतलबों नमस्तो का भी बुरा नही मानते वह केवल नमस्ते और नमस्ते करने वालो को पसंद करते हैं !

उसे लगता है कि इस पृथ्वी पर जन्मा हर आदमी उसे जानता है और उसे नमस्ते करना उसका फ़र्ज़ है और जो भी इस फ़र्ज़ निभाने मे कौताही करता है वह उससे मन ही मन नाराज़ हो जाता है ,वह नमस्ते इकट्ठा ज्यादा करता है ,बाँटता कम है ! साहब कितना बडा या छोटा है यह पहचान करने का सबसे आसान तरीक़ा है कि आप यह देखें कि उसे मिलने वाले और उसके द्वारा की जाने वाली नमस्ते का प्रतिशत क्या है !

साहब हर जान पहचान वाले से नमस्ते चाहता है ,वह सामने वाले की नमस्ते की क्वॉलिटी के हिसाब से तय करता है कि वह अच्छा आदमी है या नही ,बहुत बार वह यह जानता भी है कि उसे मिलने वाली नमस्ते ज्यादा खरी नही है फिर भी वह नमस्ते करने वाले नक़ली आदमी को नमस्ते ना करने वाले असली आदमी से ज्यादा तवज्जो देता है !

अमूमन साहब को सीधी रीढ़ की हड्डी वाले ज्यादा नही भाते वह हमेशा पाँव छूने वाले को साधारण नमस्ते करने वालो से ज्यादा आँकता है ,और दंडवत करने वालो को पाँव छूने वालो से बेहतर आदमी मानता है ! साहब आपसे कैसा व्यवहार करेगा ये आपके द्वारा की गई नमस्ते के तरीक़े पर निर्भर करता है! आप नमस्ते करें साहब को और नमस्ते की मुद्रा मे ही बने रह जाये ,आपकी शख्शियत मे जितना भी तमीज शामिल हो वह आँखो से टपकने लगे ! दंडवत करे तो उठें ही ना ! लोग उठाना चाहें आपको तब भी आप धरती ना छोडें ! आपकी ऐसी हरकतो को साहब अपने प्रति श्रद्धा मे काऊंट करता है ! आपके प्रति अच्छी धारणा बनाता है वो अपने मन मे ! और साहब के मन मे आपके लिये कुछ अच्छा अच्छा सा हो यह आपके लिये अच्छा ही है !

साहब यह चाहता है कि चराचर जगत उसे नमस्ते करे ,वह चाहता है कि उसे मिलने वाले नमस्ते चरणस्पर्श टाईप के हों और उसका काम मुंडी हिलाने भर से चल जाये और उसकी नमस्ते करने की नौबत नही आये पर जब भी ऐसी नौबत आती है ,वह अपने से बडे वाले से मिलता है तो ख़ुद को मिलने वाली नमस्ते से बेहतर तरीक़े से नमस्ते करके दिखाता है!

नमस्ते की बडी महिमा है ! नमस्ते वह युक्ति है जो आपके लिये रेगिस्तान मे भी फूलों का इंतजाम करवा सकती है ! ऊंचे पहाडो पर सर्र से पहुँचाने वाली रोप वे जैसी तकनीक है ये ! गहरे समुद्र के मोती चाहिये हों और वो आपको नमस्ते के बिना हासिल हो जायें ये मुमकिन ही नही हैं ! जिसे नमस्ते करना नही आता उसके जीने मरने मे अंतर कर पाना बडी मशक्कत का काम है !

मेरी तो यही सलाह है आपको ,यदि किसी साहब से काम अटका हुआ है आपका ,और आपको क़ायदे से नमस्ते करना नही आता है तो रहने ही दीजिये ,इसके बिना तो काम बिगाड़ लेगें आप अपना ! सीख ही लीजिये नमस्ते करना ! बहुत काम की चीज़ है ये ! इसे सीख लेगें और कुछ सीखने की ज़रूरत रह नही जायेगी!

मुकेश नेमा

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