पितृपक्ष के साथ शनिश्चरी अमावस्या, बन रहा महासंयोग

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श्राद्धपक्ष का आरंभ हो चुका हैं वैसे तो श्राद्ध के 16 दिनों को ही बहुत महत्व दिया गया है लेकिन पितृपक्ष की अमावस्या को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया हैं। इस पितृ मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए श्राद्ध से पितरों को मोक्ष मिलता हैं और उनके तर्पण से उनके लिए परलोक में जाने के रास्ते खुल जाते हैं। इससाल पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन एक ऐसा संयोग आ रहा है जो कि इस दिन को और भी ज्यादा खास बना रही हैं।

जी हां इस दिन 20 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है जिससे इस दिन महत्व यह दृष्टि से खास माना जा रहा हैं। इस दिन मोक्ष अमावस्या होने के साथ ही शनिश्चर भी हैं। हिन्दू धर्म में शनिश्चर अमावस्या को भी बहुत महत्व दिया गया हैं। जहां एक ओर गयाकोठा, रामघाट और सिद्धवट पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान व तर्पण करेंगे, वहीं त्रिवेणी संगम तीर्थ घाट स्थित शनि मंदिर में शनिश्चरी अमावस्या का मेला लगेगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु पतित पावनी मां शिप्रा में स्नान दान कर पुण्य लाभ कमाएंगे।

क्यों बना विशेष संयोग

अनुभवी ज्योतिषियों के अनुसार नक्षत्र मेखला की गणना से देखें तो शतभिषा नक्षत्र के तारों की संख्या 100 है। इसकी आकृति वृत्त के समान है। यह पंचक के नक्षत्र की श्रेणी में आता है। यह शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा के दिन विद्यमान है। इसलिए यह शुभफल प्रदान करेगा।

शनिश्चरी अमावस्या पर 20 साल बाद बन रहा ऐसा संयोग

श्राद्ध पक्ष का समापन 28 सितंबर 2019 को शनिश्चरी अमावस्या के संयोग में होगा। 28 सितम्बर 2019 को सर्वपितृ अमावस्या पर शनिश्चरी का संयोग 20 वर्ष बाद बन रहा है जब भाद्रपद मास की पूर्णिमा से श्राद्ध पक्ष का आरंभ होगा और शनिश्चरी अमावस्या पर समापन। हालांकि पक्षीय गणना से अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ पक्ष बताया गया है। क्योंकि पंचागीय गणना में मास का आरंभ पूर्णिमा से होता है। इसलिए पूर्णिमा श्राद्ध पक्ष का पहला दिन माना गया है। इसके बाद पक्ष काल के 15 दिन को जोड़कर 16 श्राद्ध की मान्यता है।

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