सत्य सनातन धर्म : शुभद्विपुष्कर योग, वृद्धि योग और ध्रुव योग के बीच आज मनाई जाएगी कामिका एकादशी, की जाती है भगवान विष्णु की आराधना

श्रावण मास की एकादशी के अवसर पर प्रत्येक वर्ष की तरह कामिका एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। इस वर्ष कामिका एकादशी द्विपुष्कर योग, वृद्धि योग और ध्रुव योग के बीच आज मनाई जाएगी, जोकि अत्यंत शुभ फलदायक है। कामिका एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है।

भारतीय सनातन संस्कृति में प्रत्येक दिन एक त्यौहार के स्वरूप में होता है। कोटि देवी-देवताओं से परिपूर्ण सत्य सनातन धर्म धार्मिकता (Religiousness), आध्यत्मिकता (spirituality) और वैज्ञानिकता (scientism) का त्रिवेणी संगम है। इसी सनातन परम्परा के अंतर्गत आज श्रावण मास की एकादशी के अवसर पर प्रत्येक वर्ष की तरह कामिका एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। इस वर्ष कामिका एकादशी द्विपुष्कर योग, वृद्धि योग और ध्रुव योग के बीच आज मनाई जाएगी, जोकि अत्यंत शुभ फलदायक है।

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भगवान विष्णु को है समर्पित कामिका एकादशी

भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना में एकादशी का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक वर्ष में कुल 24 एकादशी आती हैं, जिसमें प्रति महीने दो एकादशी होती हैं । कामिका एकादशी भी भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित है। भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की भी विशेष आराधना आज के दिन की जाती है। लक्ष्मीनारायण युगल का पीले वस्त्र और आभूषण से शृंगार किया जाता है, साथ ही पीले पुष्प भी आराध्य को अर्पित किए जाते हैं। पीला रंग भगवान विष्णु को अतिप्रिय माना गया है।

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पीले वस्त्र धारण करके करें पूजन, आराधना

कामिका एकादशी पर पीले रंग का विशेष महत्व होता है। भगवान विष्णु और माता पार्वती के प्रिय रंग होने के साथ ही पीला रंग सकारात्मक और नैसर्गिक समृद्धि का भी प्रतीक है। आज के दिन स्नान के पश्चात पीले रंग के साफ-सुथरे वस्त्र पहन कर सात्विक भाव से भगवान लक्ष्मीनारायण का पूजन आराधन करना चाहिए। इसके साथ ही युगल को पीले पुष्प और तुलसी विशेष रूप से अर्पित करना चाहिए। आचार-विचार और आहार-विहार में पवित्रता रखते हुए कामिका एकादशी का पूजन करने से सकल मनोरथ की प्राप्ति होती है।