बचपन में अपने धोबी के यहाँ जाकर टीवी देखा करता था : सैफ अली खान

नवाब सैफ अली खान इन दिनों अपनी रिलीज़ के लिए तैयार फिल्म 'लाल कप्तान' के प्रमोशन में जुटे हैं। इसी दौरान हमसे हुई बातचीत में सैफ ने करीना के रेडियो चैट शो में जाने का अनुभव साझा किया।

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नवाब सैफ अली खान इन दिनों अपनी रिलीज़ के लिए तैयार फिल्म ‘लाल कप्तान’ के प्रमोशन में जुटे हैं। इसी दौरान हमसे हुई बातचीत में सैफ ने करीना के रेडियो चैट शो में जाने का अनुभव साझा किया। सैफ की मानें तो उन्हें करीना के शो में बहुत कम बात करने का मौका मिला, क्योंकि समय कम था, सैफ आराम से बातचीत करने के मूड में थे, लेकिन शो पर जाकर पता चला कि सिर्फ रेडियो में बात नहीं करनी, बल्कि शो का विडियो भी बनाया जा रहा है।  

‘लाल कप्तान’ में सैफ नागा साधू की भूमिका में हैं, यह ऐसे समय की कहानी है जब हिंदुस्तान में मुगलों का अंत हो रहा था और भारत में अंग्रेजों का आगमन हो चुका था, अंग्रेज भारत में अपनी जगह बनाने में जुटे थे। फिल्म में सैफ के लुक की जमकर चर्चा हो रही है, भस्म से रमा चेहरा, बड़ी-बड़ी बालों की जटाएं, घुड़सवारी, तलवारबाजी और बदले की आग में झुलसते नागा साधू की भेष-भूषा लोगों को आकर्षित कर रही है। सैफ की यह फिल्म 18 अक्टूबर को रिलीज़ होगी।

        
करीना के रेडियो शो में जाने का अनुभव कैसा रहा?
सैफ कहते हैं, ‘करीना के रेडियो शो में जाने का अनुभव बेहद मजेदार रहा, करीना का शो रेडियो से ज्यादा टीवी शो जैसा था, शो में कई कैमरे लगे थे, शो में बात करने के लिए समय बहुत कम था, मुझे और भी ज्यादा बात करनी थी, लेकिन शो के हिसाब से समय कम मिला। समय और शो के हिसाब से अच्छे से तैयार जवाब जल्दी देना था। शो में रिलैक्स होकर बातचीत करने का माहौल नहीं था। मेरे हिसाब से रिडियो में आराम से बातचीत करना चाहिए।’ क्या कभी आपने रेडियो शो होस्ट करने की बात सोची है? सैफ कहते हैं, ‘शायद, हो सकता है, मौका मिला तो मैं भी रेडियो शो होस्ट कर सकता हूं। अब मेरा अगला मिशन होगा रेडियो शो को होस्ट करना। सिर्फ और सिर्फ रेडियो।’

क्या कभी क्रिकेट की कॉमेंट्री की है आपने?
सैफ बताते हैं, ‘बचपन में टीवी नहीं था तब मैं क्रिकेट की कॉमेंट्री करता था, उस समय भारत में टीवी नहीं आया था। आपकी जानकारी के लिए बता दूं  जब हम लोग दिल्ली में रहते थे, तब हमारे घर से पहले हमारे धोबी के घर टीवी आया, हम वहीं टीवी देखने जाते थे। बाद में मेरे डैडी ने टीवी लिया। घर में टीवी न लेने की वजह थी पिताजी की पुरानी सोच। जितना भी मुझे याद आता है, उस हिसाब से हमारे घर में टीवी 1990 की शुरुआत में आ गया था। जब टीवी आया तब हम उसमें वीसीआर में पुरानी कैसेट्स लगाकर देखा करते थे।’

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