उत्तम स्वामी:स्वामी जी के आशीर्वाद से हो रहे जनजागृति के कार्य

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स्वामी जी के आशीर्वाद से अनेक ग्रामों में सेवा प्रकल्प पर चल रहे हैं. कई ग्रामों में जनजागृति के कार्य हो रहे हैं. ऐसे गांव का निरुत्साह का वातावरण दूर होकर नई ऊर्जा के साथ लोग अपने काम में लग रहे हैं. इससे ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति सुधर रही है. व्यसनाधीनता दूर हो रही है. धार्मिक भावना बढ़ रही है.

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बांसवाड़ा से 5 किलोमीटर की दूरी पर पिपलोद नामक ग्राम है. उसकी ख्याति अच्छी नहीं थी. लोग बाग रातबेरात उस गाँव के पास से गुजरने में डरते थे. कृषि की और किसी का ध्यान नहीं था. इस कारण ग्राम वासियों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. ऊपर से व्यसनाधीनता थी. उत्तम स्वामी जी के संपर्क में आने के पश्चात लोगों की जीवनशैली बदली. किसान कृषि कर्म में लगे. आज उस गांव के लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी है. बच्चों को पढ़ने के लिए विद्यालय भेजने लगे हैं.

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स्वामी जी ने जनसहयोग से गांव के विद्यालय में सभाकक्ष बनवाया. कुकड़ा ग्राम में स्वामी जी का प्रवास हुआ. स्वामी जी के उपदेशों से प्रेरित होकर अधिकांश युवाओं ने स्वामी जी से दीक्षा ली तथा बुरी आदतें छोड़ने का संकल्प लिया. वे प्रतिदिन रात्रि को मंदिर में एकत्रित होकर सामूहिक कीर्तन करते हैं. परिणाम स्वरूप ने उत्साह का वातावरण दूर हुआ है तथा एकता की भावना वृद्धि हो रही है.

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भूमि व काम के अभाव में स्थिति देशभर में ठीक नहीं है. राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है. उनके पास खाने के लिए पर्याप्त खाना नहीं है ना रहने के लिए आवास और पहनने के लिए कपड़े है . स्वामी जी की प्रेरणा से कोठारा ग्राम के वनवासी बच्चों को कपड़े वितरित किए गए. कुशलगढ़ में वनवासी छात्रावास में विद्यार्थियों में कंबल वितरित किए गए.

मध्यप्रदेश के मंदसौर नगर से कुछ दूरी पर एकांत में हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा है. वहां न तो व्यवस्थित मंदिर था और नहीं भक्तों की विशेष चहल-पहल थी. स्थान एक प्रकार से उपेक्षित था. स्वामी जी की प्रेरणा से मंदिर निर्माण तो हुआ ही, साथ ही विद्यालय भवन तथा मंगल कार्यालय का भी निर्माण किया गया है. बंजारी बालाजी अब जागृत देवस्थान है. बंजारी बालाजी जन सेवा न्यास द्वारा वर्ष में एक बार विशाल भंडारे का आयोजन होता है. धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ कवि सम्मेलन तथा खेलों का आयोजन भी उत्साह से किया जाता है.

मंदसौर सीमावर्ती नगर है. चिकित्सा की पर्याप्त सुविधा का अभाव है. गंभीर रोगियों को प्रदेश के इंदौर, राजस्थान के उदयपुर अथवा गुजरात के नडियाद के बड़े चिकित्सालय में ले जाना पड़ता है. लोगों की असुविधा दूर करने के निमित्त न्यास ने रुग्ण-वाहन सेवा प्रारंभ की है. नाम-मात्र शुल्क पर यह सेवा 3 वर्षों से की जा रही है. असंख्य लोग इसका लाभ ले चुके हैं.

मंदिर परिसर में मंगल भवन का निर्माण भी ग्रामीण जनता के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है विवाह आदि मांगलिक कार्यों के लिए मंगल भवन ग्रामीण जनता को निशुल्क दिया जाता है. मांगलिक भवन के निर्माण में स्थान अभाव तथा खुले में समारोह करने की समस्या से ग्रामीणों को मुक्ति मिली है.

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