मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ में सिंधिया को पछाड़ सकते है पटवारी

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भोपाल | मध्यप्रदेश में जल्द ही कांग्रेस अध्यक्ष का एलान होने वाला है लेकिन इसके पहले हो रही खींचतान पार्टी के लिए ठीक नहीं है | बड़े नेताओं के मतभेद खुलकर सामने आ गये हैं | प्रदेश की राजनीति मजेदार हो चली है। अध्यक्ष पद से कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया है। सिंधिया का नाम अव्वल है, लेकिन दिग्विजय सिंह फोड़े पाडऩे से पीछे नहीं हट रहे हैं और उन्होंने जीतू पटवारी का नाम आगे बढ़ा दिया है। पटवारी के नाम पर कमलनाथ को परेशानी नहीं है और राहुल गांधी की खामोश मंजूरी भी है। सिंधिया अपने दम पर अपने अस्तित्व की बड़ी लड़ाई खुद लड़ रहे हैं। यहां पेंच यह आ गया है कि अगर 1984 के दंगों की फाइल फिर से खुल रही है और शाह ऐसा मौका नहीं चूकने वाले हैं, तो कमलनाथ को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। ऐसी हालत में सिंधिया से बेहतर कोई नाम नहीं होगा, मुख्यमंत्री के लिए और तब सिंधिया भी जीतू पटवारी को अध्यक्ष बनाने के लिए राजी हो जाएंगे।

धमकी पर उतारू सिंधिया
आने वाले दिन मध्यप्रदेश में कांग्रेस की राजनीति का नया इतिहास लिख रहे होंगे। ज्योति सिंधिया ने पहले उमंग सिंघार का नाम आगे किया था, जिसे रोकने के लिए दिग्विजय सिंह ने अजय सिंह को हवा दी। मामला बिगड़ा। सिंधिया धमकी पर उतारू हो गए और इस उठापटक में सिंघार को समझ आ गया कि उनका काम नहीं होगा। दिग्विजय पर हमले शुरू कर दिए। इस लड़ाई ने सिंघार के साथ अजय सिंह को दौड़ से बाहर कर दिया। पहले दिन से कहा जा रहा था, अगर सिंधिया तैयार हैं, तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन दिल्ली की सियासत में सिर खपा रहे थे और कोशिश में थे अपने किसी नेता को आगे कर दिया जाए। अब उनका खुद का नाम दौड़ पड़ा है और कहा जा रहा है कि मुहर लगने वाली है, लेकिन दिग्विजय सिंह सहित विरोधी खेमे ने जीतू पटवारी का नाम आगे बढ़ा दिया है, जिन्हें राहुल गांधी के दफ्तर से भी ताकत मिली हुई है।

पटवारी को अहमद पटेल का साथ
अहमद पटेल भी पटवारी के साथ हैं और कमलनाथ को जिस तरह से पटवारी ने साधा है, दूरियां खत्म की हैं, वो भी सिंधिया को रोकने के लिए जीतू के साथ खड़े हो सकते हैं। फिर अशोक गेहलोत की मदद भी है। जब से सिंधिया का नाम आया है, विरोधियों को अब लड़ाई में दम लाने के लिए सिर्फ जीतू का ही सहारा है।