किसान आंदोलन में नया मोड़ : फिर भूख हड़ताल पर बैठे किसान

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद भी केंद्र सरकार की मुसीबते कम होने का नाम नहीं ले रही। हाल ही में किसानों के सबसे बड़े प्रतिनिधित्व के रूप में संयुक्त किसान मोर्चा ने एमएसपी सहित सभी मुद्दों पर सरकार से बातचीत के लिए 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद भी केंद्र सरकार की मुसीबते कम होने का नाम नहीं ले रही। हाल ही में किसानों के सबसे बड़े प्रतिनिधित्व के रूप में संयुक्त किसान मोर्चा ने एमएसपी सहित सभी मुद्दों पर सरकार से बातचीत के लिए 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। वहीं किसानों ने 7 दिसंबर को अगली रणनीति के लिए कुंडली बॉर्डर पर एक बैठक भी बुलाई है। और तभी रविवार को कुंडली बॉर्डर पर मुख्य मंच के नजदीक ही छह किसान एमएसपी गारंटी कानून की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। भूख हड़ताल पर बैठे हुए ये छह किसान राजेंद्र सिंह, गांव कोहला, सोनीपत; सतनाम सिंह, पटियाला, पंजाब; बिक्रम सिंह,गुरदासपुर, पंजाब; करतार सिंह, कैथल; नरेश सांगवान, अंबाला; कुलदीप सिंह, मोगा, पंजाब हैं।

भूख हड़ताल पर बैठे हुए इन किसानों की मांग है कि उन्हें एमएसपी पर कमेटी नहीं चाहिए, बल्कि गारंटी कानून चाहिए और इसके बाद ही वे वापस लौटेंगे। उन्होंने कहा कि वे अगली रणनीति के लिए कुंडली बॉर्डर पर 7 दिसंबर को जो बैठक बुलाई गई हैं, तब तक भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे। और अगर बैठक में भी कुछ निर्णय नहीं लिया जाता हैं तो वे हड़ताल जारी रखेंगे।

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भूख हड़ताल पर बैठे सभी किसानों ने खुद को बेड़ियों से बांधा हुआ हैं। जिससे वे ये सन्देश दे रहे हैं कि किसान हमेशा से गुलामी की जंजीरों में झकड़ा रहा हैं। और सरकारों का ध्यान किसानों की तरफ गया ही नहीं हैं। किसानों का कहना हैं कि जिस दरियादिली से तीनों काले कानून वापस लिए हैं वैसे ही MSP को लेकर भी सरकार कानून क्यों नहीं बना देती?

किसानों का कहना है कि सरकार कमेटी बनाकर इस मुद्दे को बीच में ही लटका देगी, लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे। और यहां से MSP गारंटी कानून लेकर ही जाएंगे। जब तक इस बारे में सरकार की तरफ से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता या किसान मोर्चा कोई अहम कदम नहीं उठाता वे भूख हड़ताल इसी तरह जारी रखेंगे।