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धरती पर मंडरा रहा एक और ख़तरा, हिंद महासागर के नीचे टूट रही टेक्टोनिक प्लेट

नई दिल्ली: दुनियाभर में चल रहे कोरोना संकट के बीच नए खतरों की भी खबर आ रही है। हाल ही में एक रिसर्च के मुताबिक़ हिंद महासागर के नीचे मौजूद विशाल टेक्टोनिक प्लेट टूटने जा रही है। वैज्ञानिकों की रिसर्च में पाया गया है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच की टेक्टोनिक प्लेट आने वाले समय में खुद-ब-खुद दो हिस्सों में विभाजित हो जाएगी। इसे भारत-ऑस्ट्रेलिया-कैपरीकॉर्न टेक्टोनिक प्लेट के रूप में भी जाना जाता है।

रिसर्च के मुताबिक़ इस प्लेट के टूटने का असर इंसानों पर कई सालों के बाद दिखेगा। शोधकर्ताओं ने रिपोर्ट में बताया कि यह टेक्टोनिक प्लेट बेहद धीमी गति से टूट रही है। इसके टूटने की रफ्तार 0.06 यानी 1.7 मिली मीटर्स प्रतिवर्ष है। ऐसे देखा जाए तो प्लेट के दो हिस्से 10 लाख साल में तकरीबन 1 मील यानी 1.7 किलोमीटर की दूरी तक खिसक जाएंगे।

सहायक शोधकर्ता ऑरेली कॉड्यूरियर ने लाइव साइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया कि यह प्लेट इतनी धीरे-धीरे अलग हो रही है कि शुरुआत में इसका पता नहीं चलेगा। इन प्लेटों के खिसकने की रफ़्तार भले ही काफी धीमी हो लेकिन ये घटना बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्लेटों के खिसकने से या टूटने से धरती की संरचना में बहुत बड़े बदलाव आते हैं।

शोधकर्ता शुरुआत में पानी के नीचे हो रही इस घटना को समझ नहीं पा रहे थे। हालांकि, जब दो मजबूत भूकंपों का उद्गम स्थल हिंद महासागर निकला तो शोधार्थियों को अंदाजा हुआ कि पानी के नीचे कुछ हलचल हो रही है।

ऑरली ने लाइव साइंस को बताया कि यह घटना किसी पहेली जैसी है जहां केवल एक प्लेट नहीं है बल्कि तीन प्लेट्स आपस में जुड़कर एक ही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। टीम अब उस वॉरटन बेसिन नाम के विशेष फ्रैक्चर जोन पर ध्यान दे रही है जहां ये भूकंप आए थे।