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गणित का रोना,मुकेश नेमा जी की विशेष टिप्पणी

Posted on: 06 May 2018 11:13 by Ravindra Singh Rana
गणित का रोना,मुकेश नेमा जी की विशेष टिप्पणी

गणित का तो ये है ये या तो बनती है या नही बनती ! किसी से क्यो बनती है और कैसे बन जाती है राम जाने , पर जिनसे बनती है उनके तो मज़े से सौ मे सौ ! क्लॉस मे बैठने के लिये आगे की सीटें और मास्टरों की शाबाशी ! और जिनसे नही बनती उनकी बताने मे कलेजा मुँह मे आता है ! नम्बर मिलगें बडी मुश्किल से सत्रह अठारह और साथ मे मिलेगी ज़माने भर की किरकिरी!

गणित का रट्टा भी नही लगाया जा सकता ! गणित मोहल्ले की सुंदर ,अभिमानी लड़की की तरह होती है यदि वह यह तय कर ले कि वह आपसे राजी नही है तो आप जान लड़ा दीजिये नतीजे मे बेइज़्ज़ती ही हाथ लगना है !

गणित ना आने के बावजूद गणित के सवालों से जूझना ऐसा है जैसै आपको किसी मेले मे इलेक्ट्रिक चकरी वाले बडे से झूले मे ज़बरदस्ती बैठा दिया जाये ! पेट मे हवा भर जाती है ! चीखे निकलने लगती है ,आसपास वाले हँसते है सो अलग ! आप चाहते है कि तेज़ी से घूमता झूला रोक दिया जाये ताकि आप उतर सके पर ऐसा होता नही कभी ! वो तेज़ी से घूमता रहता है और आप असहाय से चकरघिन्नी बने रहते है !

गणित से डरे किसी लडके से पूछ कर देखिये वो यक़ीनन गणित की क्लॉस मे जाने के बजाय बारूदी सुंरगो से भरे लड़ाई के मैदान मे जाना ज्यादा पसंद करेगा ! उसका यह फ़ैसला इस लिहाज़ से वाजिब होगा क्योकि वहाँ से सही सलामत लौटने की कुछ तो गुंजाईश बनी ही रहती है !

परीक्षा के बाद मिलने वाली दिल दहलाती गणित की कापियो मे फाँसी के फंदो से डरावने लाल लाल गोले ! ऐसी रंगी पुती कापियों पर अपने जल्लाद से बाप के दस्तखत करवाना कितनी बडी फ़ज़ीहत का काम होता है , वो तो कोई गणित का मारा ही समझ सकता है ! ऐसे मे कोई शरीफ़ बच्चा अपने पिताजी के दस्तख्त खुद ना बना ले तो क्या करे !

गणित मे अव्वल नम्बर लाने वालो को देखिये ! मोटे मोटे लैंस वाले चश्मे ! अपने से कम नम्बर लाने वालो को कीड़े मकोड़े समझने वाले ! राहत की बात बस इतनी ही है कि गणित मे अच्छे नम्बर लाकर ऐंठे ऐंठे फिरने वाले बडे होकर बनते हैं इंजीनियर ! और नौकरी की तलाश में मारे मारे फ़िरते हैं !
या किसी बिना गणित वाले सेठ के यहाँ नौकरी कर उसके पैसे धेले का हिसाब जोडने मे अपनी जिंदगी खर्च कर लेते है !

ये और कुछ नही हम से फिसड्डियो की आह लेने का नतीजा है !
हुआ ये होगा जब नरक मे लोगों को तपाने के लिये कढाहे कम पड़ गये होगे तो शैतान ने गणित की इजाद की होगी ! गणित के सूत्रो और नर्क के कोड़ों मे अंतर करना तो नामुमकिन ही समझिये !

उपर वाला सभी को तो हमेशा नर्क मे रख नही सकता ! बहुत भीड़ भाड हो जाती होगी वहाँ पर भी ! इसलिये उसने धरती बनायी और धरती पर ही बतौर नरक की फ़्रेंचाइज़ी दी गणित पढ़ाने वाले यमदूतों से मास्टरों को ताकि नरक पर लोड कम हो और और हम यही धरती पर ही अपने पुराने जन्मों के पापों की सज़ा भुगत सके !

मै कभी यह समझ नही पाया कि गणित की ज़रूरत है क्या ! गणित नही थी तब भी तो लोग ज़िंदा रह ही लेते थे ! इस दुनिया मे गणित ना होती ! जोडने घटाने का प्रपंच ना होता तो ये दुनिया और अधिक बेहतर, रहने लायक जगह होती ये तय है !

मुकेश नेमा

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