कार्तिक मास में दीपदान और स्नान से प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु, पर इन कामों से रहें दूर

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हिन्दू मान्यताओं के अनुसार कार्तिक का महीना बहुत ही फलदायी होता है। इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। इस महीने में व्रत, पूजा-पाठ सभी का बहुत महत्व होता है। मान्यता है कि इस महीने में सूर्योदय से पहले स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, ऐसा करने से सभी तीर्थ स्थानों का पुण्य प्राप्त होता है।
कार्तिक महीने में कई बड़े व्रत त्योहार आते है और सभी त्योहारों में दिवाली पर्व को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। वहीं देवउटनी एकादशी के बाद शादी और भी अन्य शुभ कार्य होना शुरु हो जाएंगे। इस महीने के कई महत्व है, आइए जानते है कुछ खास महत्व के बारे में।

इस महीने में कई ऐसी चीजे है जिन्हे शास्त्रों में करने से मना किया गया है। वहीं कई ऐसी बातें भी है जिन्हें इस महीने में अवश्य अमल करना चाहिए।

1- इस महीने में मांस-मछली व मट्ठा का त्याग करना चाहिए। इसके साथ ही पूरे महीने संयम से रहना चाहिए। इसके अलावा व्रत-उपवास और नियम के साथ तप करना चाहिए।

2- धर्म शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास में सबसे प्रमुख काम दीपदान करना बताया गया है। इस महीने में नदी, पोखर, तालाब आदि में दीपदान किया जाता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।

3- इस महीने में तुलसी पूजन करने तथा सेवन करने का विशेष महत्व बताया गया है। वैसे तो हर मास में तुलसी का सेवन व आराधना करना अच्छा होता है, लेकिन कार्तिक में तुलसी पूजा का महत्व कई गुना माना गया है।

4- भूमि पर सोना कार्तिक मास का तीसरा प्रमुख काम माना गया है। भूमि पर सोने से मन में सात्विकता का भाव आता है तथा अन्य विकार भी समाप्त हो जाते हैं।

5- कार्तिक महीने में केवल एक बार नरक चतुर्दशी के दिन ही शरीर पर तेल लगाना चाहिए। कार्तिक मास में अन्य दिनों में तेल लगाना वर्जित है।

6- कार्तिक महीने में द्विदलन अर्थात उड़द, मूंग, मसूर, चना, मटर, राई आदि नहीं खाना चाहिए।

7- कार्तिक मास में ब्रह्मचर्य का पालन अति आवश्यक बताया गया है। इसका पालन नहीं करने पर पति-पत्नी को दोष लगता है और इसके अशुभ फल भी प्राप्त होते हैं.

8- व्रत करने वाला तपस्वियों के समान व्यवहार करे। अर्थात कम बोले, किसी की निंदा या विवाद न करे, मन पर संयम रखें आदि।

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