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भगवान हनुमान आज भी है धरती पर मौजूद ये रहे 5 सबूत

Posted on: 30 Jun 2018 04:33 by Ravindra Singh Rana
भगवान हनुमान आज भी है धरती पर मौजूद ये रहे 5 सबूत

नईदिल्ली: भगवान श्री राम के भक्त हनुमान जी की अनसुनी बाते आपको बताते है, हनुमान के बारे में हर कोई जनता है की हनुमानजी के कई नाम है उन्हें संकटमोचन कहा जाता है, हनुमानजी सब के दुःख हरता है, रामायण काल के अनुसार ऐसा बताया जाता है की शनिदेव को जब रावण ने कैद कर लिया था, और सनिदेव पर रावण द्वारा अत्याचार किया जा रहा था, इसके बाद जब हनुमानजी जी भगवान श्री राम की पत्नी सीता माता का पता लगाने गए थे उस समय हनुमानजी ने शनिदेव को रावण के अत्याचार से आजाद करवाया था, हनुमानजी के आजाद करने की बाद शनिदेव ने कहा था की हनुमान आप ने मुझे रावण के कैद से आजाद करवाया है, इस लिए जो व्यक्ति आपकी सच्ची आस्था से पूजा करेगा उस पर मेरी कू द्रष्टि का प्रभाव नही पड़ेगा।

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जब भी कलयुग में कोई संकट सामने आता है तो हनुमान चालीसा और दोहे को जपने से सारे संकट दूर हो जाते है, बजरंग बली की महिमा ही ऐसी है कि उनका नाम लेते ही सारे डर दूर भाग जाते हैं।

हिंदू धर्म के सबसे माने हुए भगवान हनुमान की करोड़ों भक्‍त पूजा करते हैं। उनपर विश्‍वास करते हैं, आस्‍था रखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि कलयुग में अगर कोई भगवान पृथ्वी पर साक्षात मौजूद है तो वो कोई और नहीं सिर्फ पवन पुत्र हनुमान जी महाराज है। हिन्दू धर्म में शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के अवतार हनुमान को अमर बताया गया है। हिन्दू धर्म में बजरंग बली को बल और बुद्धि का दाता कहा जाता है, सिर्फ हनुमान चालीसा पढ़ने मात्र से ही मनुष्य भय मुक्त हो जाता है। कुछ ऐसे सबूत है जो ये दर्शाते है कि भगवान हनुमान का अस्तित्व आज भी है।

हनुमान जी चिरंजिवी है, चिरंजिवी का अर्थ है, शाश्वत जो हमेशा अस्तित्व में रहता है। किसी एक श्लोक में तो नहीं लेकिन ‘महाभारत’ और ‘रामायण’ में, हनुमान जी सहित सात लोगों के ‘चिरंजीवी’ अर्थात अमर होने का जिक्र किया गया है। जिनमें महान गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र ‘अश्वत्थामा’, प्रहलाद के परपुत्र ‘बलि’, महाभारत के राजगुरु ‘कृपाचार्य’, विष्णु भगवान के छठे अवतार ‘परशुराम’, रावण के भाई ‘विभीषण’, ऋषि मृकंदु के पुत्र ‘मार्कंडेय’ और महाभारत के रचियता ‘वेद व्यास’ सम्मिलित हैं।

पुराणों में इनके जाने की बात का कही उल्लेख ही नहीं है

जब-जब भगवान ने मानव शरीर के रूप में प्रथ्वी पर जन्म लिया है। उन्हें पृथ्वी लोक को छोड़ कर जाना पड़ा है, जिसका कोई न कोई प्रमाण किसी न किसी ग्रन्थ या पुराण में मौजूद है। जैसे कि भगवान श्रीराम ने सरयू नदी में खुद को समर्पित कर अपने मानव शरीर को त्याग दिया था। लेकिन पृथ्वी लोक को छोड़ कर जाने का हनुमान जी का जिक्र किसी ग्रन्थ या पुराण में मौजूद नहीं है।

भगवान श्री राम से ज्यादा

 खुश होते हैं भगवान हनुमान

कहा जाता है के प्रभु हनुमान अपने नाम से नहीं बल्कि भगवान राम के नाम से ज्यादा खुश होते हैं अगर कोई सच्चे मन से भगवान राम की भक्ति करता है तो अवश्य ही उनका साथ भगवान हनुमान देते हैं।

भगवान श्रीराम ने भी दिया था अमरत्व का वरदान

रामायण के चालीसवें अध्याय में लिखा गया है कि जब श्रीराम लंका विजय कर लौटे थे, तब श्री राम ने हनुमान जी से प्रसन्न हो कर उनसे कहा था कि “संसार में मेरी कथा जब तक प्रचलित रहेगी, तब तक तुम्हारी कीर्ति अमिट रहेगी, और तुम्हारे शरीर में प्राण भी रहेंगे।

कलियुग में यहाँ रहते हैं हनुमान जी

श्रीमद भगवत गीता’ में ऐसा जिक्र किया गया है कि कलियुग में हनुमान जी, हिमालय के कैलाश पर्वत के उत्तर में स्थित ‘गंधमादन पर्वत’ पर निवास करते हैं।

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