मौसम के अनुरूप खादी और हर उत्सव की शान बढ़ाता सिल्क

देश के दूर-दराज के गांवों की कारीगरी को लोगों तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से खादी ग्रामोद्योग भवन, खादी ग्रामोद्योग आयोग एवं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा यह खादी बाजार लगाया गया है।

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इंदौर। खादी एक ऐसा फैब्रिक है जिसके इस्तेमाल से गर्मी में गर्मी कम लगती है और सर्दी में यदि इसे पहना जाए तो सर्दी का अहसास भी अपेक्षाकृत कम होता है। शत प्रतिशत सूती होने के साथ-साथ इसकी निर्माण प्रक्रिया इसे और भी खास बनाती है। इसी तरह सिल्क भी है जो न केवल रॉयल लुक देता है बल्कि त्वचा को भी नुकसान नहीं पहुंचाता। सिल्क और खादी के खूबसूरत परिधानों के लिए इन दिनों शहर में 16 दिवसीय खादी बाजार-2020 प्रदर्शनी जारी है। देश के दूर-दराज के गांवों की कारीगरी को लोगों तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से खादी ग्रामोद्योग भवन, खादी ग्रामोद्योग आयोग एवं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा यह खादी बाजार लगाया गया है।

पूज्य महात्मा गांधी जी की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में शहर के अर्बन हाट बाजार में लगे इस खास बाजार में पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के गांव गायसबाड़ी से आए बुनकर जुल्फीकार अली मसलिन खादी और सिल्क खादी लेकर आए हैं। वे बताते हैं कि उनके गांव में अधिकांश परिवार मसलिन खादी और सिल्क खादी की वस्तुएं बनाते हैं। मसलिन खादी 100 प्रतिशत सूती होता है और इसके धागे बहुत महीन व पास-पास होते हैं। यह खादी का बहुत फाईन रूप है। इसके लिए चरखे पर ही सूत काता जाता है और उससे कपड़ा बनाने की प्रक्रिया भी पूरी तरह हथकरघा पर ही निर्भर होती है। आज भी इसमें पावरलूम का प्रयोग नहीं होता है। सूत कातने का काम बेशक महिलाओं के जिम्मे है लेकिन कपड़े की बुनाई महिला और पुरुष दोनों मिलकर करते हैं। सिल्क खादी का निर्माण कोकून से होता है और इसकी कताई भी चरखे पर ही होती है। रेशम पाने के लिए कोकुन की खेती भी हमारे गांव में ही होती है। मसलिन सिल्क की धोती, कुर्ते, शर्ट, साड़ी और ड्रेस मटेरियल बनते हैं और सिल्क खादी से भी कई डिजाइनर गारमेंट्स बनने लगे हैं।

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प्रदर्शनी के संयोजक पंकज दुबे ने बताया – यहां केवल खादी और सिल्क के कपड़े ही नहीं बल्कि बहुत सी वस्तुएं उपलब्ध हैं जिनमें रोजमर्रा की जरूरतें, घर की सजावट और स्वाद व पूजन से संबंधित सामग्रियाँ भी शामिल हैं। इसके अलावा यहां आईओसीएल, गैल इंडिया तथा आयल इंडिया के कूपन भी रीडिम किये जा सकते हैं। ये कूपन स्टॉल नंबर 16 व 17 पर रिडिम हो रहे हैं। गत वर्ष 65 लाख की बिक्री हुई थी जबकि इस बार 1 करोड़ का लक्ष्य है।