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मंदिर के उपर से नहीं उड़ता कोई पक्षी, हवा के उल्टा लहराता है झंडा, हैरान कर देंगी जगन्नाथ मंदिर की ये बातें

Posted on: 04 Jul 2019 11:12 by Surbhi Bhawsar
मंदिर के उपर से नहीं उड़ता कोई पक्षी, हवा के उल्टा लहराता है झंडा, हैरान कर देंगी जगन्नाथ मंदिर की ये बातें

ओडिशा: ओडिशा के पुरी में प्रसिद्द भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आज से शुरू हो रही है। 10 दिन तक बनाए जाने वाले भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा उस में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते है और रथ खींचकर पुण्य कमाते है। रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ को दशावतारों के रूप में पूजा जाता है, जिनमें विष्णु, कृष्ण, वामन और बुद्ध भी शामिल हैं। यूनेस्‍को द्वारा पुरी के एक हिस्‍सों को वर्ल्‍ड हेरिटेज में शामिल करने के बाद यह दूसरी रथ यात्रा है।

धूमधाम से निकलने वाली इस रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का ही नहीं बल्कि तीनों भाई-बहन के रथों के रंग अलग होते हैं। रंगों के साथ इनके नाम भी अलग होते है। भगवान जगन्नाथ के रथ को ‘गरुड़ध्वज’ या ‘कपिलध्वज’ कहा जाता है। तीनों रथों में से भगवान् जगन्नाथ का रथ सबसे बड़ा होता है।

भगवान जगन्नाथ के रथ में 16 पहिए होते है और इसकी ऊंचाई 13.5 मीटर होती है। इस रथ में लाल और पीले रंग के कपड़े का इस्तेमाल होता है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ की रक्षा गरुड़ करते है। वैसे तो भगवान जगान्नाथ का ये मंदिर दुनियाभर में मशहूर है लेकिन इससे जुड़े कई ऐसी बाते भी है जो आपको होरां कर देगी।

जाने मंदिर से जुडी कुछ खास बातें-

  • जगन्नाथ पुरी में किसी भी स्थान से आप मंदिर के शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको सदैव अपने सामने ही लगा दिखेगा।
  • मंदिर के ऊपर लगा ध्वज हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है।
  • इस मंदिर का रसोईघर दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर है।
  • इस रसोईघर में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाए जाने वाले महाप्रसाद को बनाने के लिए 500 रसोइए और उनके 300 सहायक-सहयोगी एकसाथ काम करते हैं। यहां सारा प्रसाद मिट्टी के बर्तनों में ही पकाया जाता है।
  • हर शाम मंदिर के उपर लगे ध्वज को मानव उल्टा चढ़कर बदलता है।
  • मंदिर के सिंहद्वार में पहला कदम रखते ही मंदिर के अंदर किसी भी भक्त को सागर द्वारा निर्मित ध्वनि नहीं सुनाई देती लेकिन जैसे ही आप मंदिर से बाहर एक भी कदम रखते हैं आप इस आवाज को सुन पाएंगे।
  • इस मंदिर के ऊपर से कभी भी आप किसी पक्षी या विमान को उड़ते हुए नहीं देखेंगे।

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