Indore : स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई ने आंख में अटके फॉरेन बॉडी पार्टिकल को निकाल लौटाई रोशनी

संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा के निर्देशन में महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय इन्दौर से सम्बध्द नेत्र चिकित्सालय स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई, नेत्र रोगों के सफल उपचार की राह में अग्रसर है।

इंदौर(Indore) : संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा के निर्देशन में महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय इन्दौर से सम्बध्द नेत्र चिकित्सालय स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई, नेत्र रोगों के सफल उपचार की राह में अग्रसर है। पीड़ितों की सामान्य और सहज रूप से समझ आ जाने वाले नेत्र रोगो के साथ प्रारम्भिक रूप में न समझ आने वाली पेचीदा समस्याओ को भी आधुनिक तकनीक से खोज उनका का भी विशेष योग्यता के साथ उपचार कर रहा है। इस प्रक्रिया में अस्पताल हर संभव तकनीक और गुणवत्ता पूर्ण इलाज के साथ मरीजों को उनकी आँखों की रौशनी लौटा रहा है।

10 साल से आंख में अटके फॉरेन बॉडी पार्टिकल को स्कूल ऑफ एक्सीलेंस ने निकाल लौटाई रोशनी

मजीएम कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया है कि स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई संस्थान विविध नेत्र रोगों के उपचार एवं शल्यक्रिया हेतु स्थापित किया गया है जो बेहद पेचीदा मामलों में भी मरीजों का मददगार बन उन्हें रोशनी लौटा रहा है। ऐसे ही एक प्रकरण के तहत 50 वर्षीय सुभाष शर्मा आंख में तकलीफ के साथ उपचार कराने के लिए स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई, में पहुंचे थे। सुभाष को अपनी तकलीफ की जानकारी तो थी, लेकिन वो यह नहीं जानते थे की आंख की तकलीफ किस वजह से है।

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अस्पताल की रेटिना सर्जरी विशेषज्ञ डॉ टीना अग्रवाल और उनकी टीम ने जाँच के दौरान पाया की दस साल पहले सुभाष को अपनी दाई आंख में चोट लगी थी लेकिन कुछ दिन बाद चोट ठीक हो गई। सुभाष ने बताया की चोट ठीक होने के बाद उन्हें आंख से ठीक से दिखाई देने लगा, लेकिन अचानक दस दिन पहले हुई तकलीफ ने उन्हें अस्पताल की तलाश को मजबूर कर दिया और उसी दौरान किसी अपने की सलाह ने उन्हें स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑई पंहुचा दिया। रेटिना सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. टीना अग्रवाल के मुताबिक अस्पताल में एक्स-रे और सिटी स्कैन से पता चला की सुभाष की आंख में दस साल पहले लगी चोट के वक़्त ही फॉरेन बॉडी यानि बाहरी वस्तु मेटल पार्टिकल रह गया था जा अब मौजूद था।

फॉरेन बॉडी पार्टिकल ने ही सुभाष की दाई आंख को दस साल बाद नुक्सान पहुंचाया था। तमाम जाँच और समस्या की जड़ पता कर स्कूल ऑफ़ एक्सिलेंस फॉर ऑई की टीम की ओर से रेटिना सर्जन डॉ. टीना अग्रवाल, एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. मीता जोशी, अस्सिटेंट प्रोफ़ेसर डॉ. ऋषि गुप्ता, सीनियर रेजिडेंट डॉ. शीतल, निश्चेतना विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. के.के. अरोरा और डॉ. शालिनी जैन और ओटी टीम ने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक संपन्न किया। अपनी दाई आंख की रौशनी लौटने के बाद अब सुभाष शर्मा स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस का धन्यवाद देते नहीं थक रहे है।

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आयुष्मान मरीजों को मुफ्त और नॉन आयुष्मान मरीजों को मिल रहा है सस्ती दरों पर उपचार अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डी.के. शर्मा ने बताया है कि स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस में आयुष्मान मरीजों के लिए निशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही समय समय पर संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा के निर्देश पर लगाए जाने वाले कैंप में इस तरह की सर्जरी निशुल्क की जाती है। मरीज सुभाष शर्मा के सर्जरी प्रकरण में सर्जरी अस्पताल द्वारा तय की गई नॉन आयुष्मान मरीजों के उपचार वाली सस्ती दर के अनुसार की गई है।

सर्जरी का खर्च किसी भी निजी अस्पताल में 80 हजार से एक लाख रूपए तक आता है लेकिन स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस में महज 25 हजार के ख़र्च में किया गया है। अब तक हुए कई ऑपरेशन और लगभग 4 हजार मरीजो के नेत्र परीक्षण हुए
संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा के निर्देशन में अधिष्ठाता डॉ. संजय दीक्षित के नेतृत्व में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई चिकित्सालय में ओपीडी की सेवा प्रारंभ की गई थी।

ओपीडी के प्रारंभ से लेकर अब तक लगाए गए शिविरों में जहा लगभग चार हजार नेत्र रोगी स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस फॉर आई में परीक्षण का लाभ उठा चुके है वहीं प्रतिदिन औसतन 100 नेत्र रोगी स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस फॉर ऑई में परीक्षण का लाभ ले रहे है। महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय इन्दौर अधिष्ठाता डॉ. संजय दीक्षित ने बताया स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई को देश का उत्कृष्ट नेत्र चिकित्सालय बनाने का हर संभव प्रयास किया जायेगा। भविष्य में भी अस्पताल सामान्य मरीजों को बेहद कम शुल्क पर एवं आयुष्मान मरीजों को निशुल्क शल्य चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।