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Bhayyu Maharaj Suicide Case : चर्चित भय्यू महाराज सुसाइड केस में आरोपी विनायक को मिली राहत

इंदौर (Indore) में पांच साल पहले हुए युवा संत भय्यू महाराज सुसाइड केस(Bhayyu Maharaj Suicide Case) में आरोपी पलक पुराणिक को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी, जिसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने एक और आरोपी विनायक को राहत दी है। आरोपी द्वारा लगाई गई जमानत अर्जी पर हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे भी जमानत दे दी है। एक अन्य आरोपी शरद पंवार की जमानत अर्जी इंदौर हाई कोर्ट में लगी थी। इसमें बहस पूरी हो चुकी है, जबकि आदेश सुरक्षित है।

कोर्ट में विनायक की जमानत की अर्जी पर 10 से 15 मिनट तक सुनवाई चली। इसमें मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से जमानत का विरोध किया इस पर विनायक क्र एडवोकेट ने यह तर्क रखा कि वह ब्लैक मेलिंग और षड्यंत्र में 6 साल की सजा में से वह तीन साल, 10 महीने का कारावास भुगत चुका है। जबकि मुख्य आरोपी को 18 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी है। इन तर्कों के आधार पर पर सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी।

यह थे आरोप

पलक पर आरोप है कि उसने भय्यू महाराज के साथ अश्लील वीडियो बनाए थे। वह भय्यू महाराज को ब्लैकमेल कर रही थी। इससे तंग आकर भय्यू महाराज ने खुद को गोली मारकर अपने फ्लैट में आत्महत्या कर ली थी। इस काम में पलक के साथ महाराज के सेवादार विनायक दुधाले और शरद देशमुख भी थे। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज करने के बाद पलक और महाराज के बीच मोबाइल पर हुई चैटिंग भी जब्त की थी।

 

दवा के हाई डोज देते थे सेवादार
तीनों सेवादारों की प्रताड़ना से तंग होकर भय्यू महाराज तनाव में रहने लगे थे और उनका इलाज भी चल रहा था। डाक्टरों ने जो दवाएं लिखी थी। तीनों आरोपी एक डोज के स्थान पर तीन डोज देते थे और नशे में ही उन्होंने महाराज से सुसाइड नोट भी लिखवाया था। पुलिस ने जांच में यह भी पाया था कि बेहोशी की हालत में महाराज के वीडियो उनके सेवादारों ने बनाए थे। दरअसल, पलक महाराज के काफी करीब थी और वह महाराज से शादी करना चाहती थी, लेकिन महाराज ने आयुषी से विवाह कर लिया था। इससे पलक नाराज थी।

क्या है पूरा मामला
भय्यू महाराज ने 12 जून 2018 को खुद को गोली मार ली थी। राष्ट्रीय युवा संत के इस सुसाइड ने सभी को हैरान कर दिया था। वह भी ऐसे समय जब उन्होंने दूसरी शादी की ही थी। दो महीने तक तो पुलिस के पास कोई सुराग तक नहीं था। छह महीने बाद विनायक, पलक और शरद को गिरफ्तार किया गया। 28 जनवरी 2022 को सत्र न्यायालय ने इन तीनों को दोषी ठहराया और छह-छह साल की सजा सुनाई। पलक एवं अन्य ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है। साथ ही जमानत याचिका भी लगाई थी। पलक को सुप्रीम कोर्ट से अब जाकर जमानत मिली है।