इंदौर : अल्पसंख्यक इलाको में कम मतदान, कांग्रेस की बढ़ी चिंता

कांग्रेस की आस के केंद्र अल्पसंख्यक मतदाताओं ने इस बार निगम चुनाव में वो उत्साह नही दिखाया जो बीते विधानसभा चुनाव में प्रदर्शित किया था। शहर के किसी भी अल्पसंख्यक इलाके में 70 प्रतिशत वोटिंग नही हुआ।

नितिनमोहन शर्मा

कांग्रेस की आस के केंद्र अल्पसंख्यक मतदाताओं ने इस बार निगम चुनाव में वो उत्साह नही दिखाया जो बीते विधानसभा चुनाव में प्रदर्शित किया था। शहर के किसी भी अल्पसंख्यक इलाके में 70 प्रतिशत वोटिंग नही हुआ। खजराना ओर चंदन नगर जैसे इलाको में भी कांग्रेस की उम्मीद के अनुरूप मतदान नही हुआ। अल्पसंख्यक बहुल वार्डो में मतों के इस कम प्रतिशत से स्थानीय पार्षद उम्मीदवार को तो ज्यादा तकलीफ़ नही रहना है लेकिन कम मत प्रतिशत में महापौर उम्मीदवार संजय शुक्ला खेमे में चिंता पसरा दी है। खुलासा ने मुस्लिम वार्डो पर नजर दौड़ाई तो साफ महसूस हुआ की इस बार मुस्लिम मतदाता उदासीन नजर आए। किसी भी बूथ पर वैसी लम्बी कतारें नजर नही आई जैसी आमतौर पर इन इलाकों की चुनाव वाले दिन नजर आती है।

कांग्रेस को उम्मीद थी कि इस बार अल्पसंख्यक बहुल वार्डो में जोरदार वोटिंग होगी। लेकिन ऐसा हुआ नही। चन्दननगर जैसे इलाके में वोटिंग का आंकड़ा 63 प्रतिशत के आसपास आकर रुक गया। यहां 19786 वोटर्स थे। वार्ड 2 के इस हिस्से से कांग्रेस के मेयर उम्मीदवार संजय शुक्ला को काफी उम्मीद थी। हालांकि यहां गिरे वोट का 99 प्रतिशत शुक्ला की झोली में ही गिरे है। इसी तरह विधानसभा 1 के सिरपुर वाले वार्ड 1 में भी वोटिंग का आंकड़ा 65 प्रतिशत पर आकर रुक गया। ये वार्ड करीब 10 हजार अल्पसंख्यक वोटर्स वाला मिलाजुला वार्ड है। यहां 29743 वोटर्स है और कांग्रेस यहां अग्निहोत्री परिवार के कारण कम से कम 70 प्रतिशत की उम्मीद लगाए हुए थी।

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जूना रिसाला वाले वार्ड 8 में भी वोटिंग का प्रतिशत 63 से आगे नही बड़ा। 23 हजार वाले इस वार्ड में अल्पसंख्यक वोट बहुसंख्यक वोट की तुलना में 1500 के करीब ज्यादा है। दस्तक परिवार की घर घर दस्तक यहां इस बार ज्यादा मतदान के लिए समाज को प्रभावित नही कर पाई। निर्दलीय सरवर खान ने भी इस वार्ड से अल्पसंख्यक वोटों की हिस्सेदारी की है। खजराना जैसे अल्पसंख्यक बहुल इलाके ने इस बार चौकाया। रुबीना इकबाल खान वाले वार्ड 39 में मात्र 56 प्रतिशत वोट ही गिरे। जबकि कुल मतदाताओं का आंकड़ा यहां 31 हजार से भी ज्यादा है।

भाजपा की चुनोती यहां महज उपस्थित दर्ज कराने वाली ही थी। बावजूद इसके रुबिना के लिए बिरादरी का वोटर्स बड़ी संख्या में घर से बाहर नही निकला। खजराना के ही दूसरे वार्ड 38 में अन्नू पटेल जैसे ” जमीनी ” नेता की पत्नी सोफिया मैदान में थी लेकिन वोट का प्रतिशत 63 के आसपास ही रहा। श्रीनगर जैसे वार्ड में कांकड़ वाले हिस्से में अल्पसंख्यक वोटर्स की एक बड़ी आबादी है लेकिन यहां मात्र 55 प्रतिशत वोट ही बाहर निकले। निगम में नेता प्रतिपक्ष रही फौजिया के आजाद नगर वाले वार्ड में 61 प्रतिशत वोटिंग हुआ। 29 हजार वोटर्स वाले इस क्षेत्र में भाजपा की चुनोती महज खानापूर्ति वाली होने के बावजूद शेख अलीम की अपील इस बार समाज को गोलबंद नही कर पाई।

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ये ही हाल बम्बई बाजार वाले बेग परिवार का रहा। अयाज बेग के मैदान में होने के बाद भी यहां बोटिंग का आंकड़ा 70 प्रतिशत से पहले 68 पर आकर रुक गया। गुलजार कालोनी वाले वार्ड से भाजपा ने बोहरा समाज से वोट मिलने की उम्मीद के चलते मारिया महू वाला को टिकिट दिया। कांग्रेस से साजिद खान परिवार के शाहीन मैदान में थे लेकिन वोट यहां 63 प्रतिशत ही बाहर आये।

इमली बाजार वाले क्षेत्र क्रमांक 3 के वार्ड 58 में अनवर कादरी के मैदान में होने के बाद भी वोटिंग का प्रतिशत 62 रहा जो कादरी ओर कांग्रेस की उम्मीद से कम से कम 10 प्रतिशत कम रहा। इसी विधानसभा के रानीपुरा वाले वार्ड 60 में आंकड़ा 68 प्रतिशत तक पहुंचा जरूर लेकिन यहां भाजपा की रंजना पिपले ने भी मतदान वाले दिन नार्थ तोड़ा वाले हिस्से में अच्ची खासी सेंध भी लगाई। कांग्रेस के सुनहेरा अंसारी को मतदान वाले दिन आधे दिन बाद अहसास हुआ की बिरादरी का वोट बट रहा है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।