विपिन नीमा

इंदौर। शहर का सबसे बिगड़ैल , अस्त – व्यस्त हमेशा वाहनों से पटा रहने वाला जवाहर मार्ग को सुधारने के लिए कई सालों से प्रयास चल रहे है , लेकिन यह मार्ग न तो सुधरा, न सुलझा , न बदला। आज भी सुबह हो या शाम वाहनों की रेलमपेल बनी रहती है। कई बार तो घंटों जाम में फंसना पड़ता है। आलम यह है कि लोग इस मार्ग से गुजरने में कतराते है।

परेशान करने वाली जवाहर मार्ग की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए 12 साल पहले डॉ. उमाशशि शर्मा ने महापौर रहते सबसे पहले जवाहर मार्ग पर एलिवेटेड ब्रिज बनाने की पहल करते हुए शासन को प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन विधानसभा 4 की विधायक मालिनी गौड़ ने इसका विरोध करते हुए दूसरे विकल्प तलाशने की बात कहते हुए उक्त प्रस्ताव को निरस्त करवा दिया। इसके बाद एलिवेटेड ब्रिज नहीं बन पाया और जवाहर मार्ग पर ट्रैफिक की समस्याएं जस की तस रहीं।

60 करोड़ रु की लागत से बनने वाला था एलिवेटेड ब्रिज

नगर निगम ने जवाहर मार्ग पर एलिवेटेड ब्रिज बनाने के लिए सारी तैयारी कर ली थी। 15 दिन में फिजिबिलिटी सर्वे करने के बाद तात्कालीन महापौर उमा शशि शर्मा ने ब्रिज की प्रोजेक्ट रिपोर के साथ नया प्रस्ताव शासन को भेजा था। प्रस्तावित ब्रिज की लागत करीब 60 करोड़ रु आई थी।

शासन से मंजूरी मिलने के बाद राजमोहल्ला चौराहे पर इसके भूमिपूजन के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आ गए थे, लेकिन ऐनवक्त पर भूमिपूजन समारोह स्थगित करना पड़ा था। हालांकि विधायक मालिनी गौड़ ने व्यापारियों के साथ इसके विरोध में धरना देने की बात कही थी। इस विरोध के चलते एलिवेटेड ब्रिज की कहानी वही समाप्त हो गई। 13 साल गुजर गए, लेकिन इसके बाद किसी भी जनप्रतिनिधि ने जवाहर मार्ग पर एलिवेटेड के लिए आवाज नही उठाई।

वैकल्पिक मार्ग निकाला, लेकिन किसी काम का नहीं

राजनीति के भेंट चढ़ा एलिवेटेड का तो कुछ नही हुआ, लेकिन जवाहर मार्ग के वैकल्पिक मार्ग के रुप में सरवटे-गंगवाल तक 4 लेन रोड खोजा। विधायक मालिनी गौड़ ने महापौर बनने के बाद उन्होंने सरवटे-गंगवाल तक रोड का काम शुरू करवा दिया। तब ये कहा गया था की इसके बनने से जवाहर मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। इस वैकल्पिक मार्ग की वर्तमान स्थिति यह है की तैयार नही हुआ है । रोड का एक हिस्सा अधूरा है।

सुधार की दिशा में कई बार हुए नए – नए प्रयोग

जवाहर मार्ग को व्यवस्थित करने के लिए जिला प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस , नगर निगम के अधिकारियों व कई ट्रैफिक विशेषज्ञों ने कई बार दौरे किए ओर सुधार की दृष्टि से पूरे मार्ग पर नए-नए प्रयोग भी किए गए, लेकिन एक भी प्रयोग सफल नही हुआ। आज भी जवाहर मार्ग की यही स्थिति बनी हुई है। पूरे मार्ग पर अनेक स्थानों पर अतिक्रमण भी है। प्रेमसुख टॉकीज के पास बहुमंजिला पार्किंग है , लेकिन इसका उपयोग कोई नही करता है।

प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख वाहनों की आवाजाही

जवाहर मार्ग का हिस्सा राजमोहल्ला से सियागंज ब्रिज (पटेल ब्रिज) तक करीब पौने तीन किलोमीटर का है। इस मार्ग से कई चौराहे जुड़ते हैं। उनमें मालगंज चौराहा, नृसिंह बाजार, मोहनपुरा, यशवंत रोड गुरुद्वारा, नंदलालपुरा और सैफी चौराहा है। ये सभी चौराहों इतने व्यस्त है कि दिनभर वाहनों का दबाव बना रहता है। इस मार्ग पर साइकिल से लेकर दो-तीन और चार पहिया वाहनों के अलावा 900 एमएम की लंबी-चौड़ी सिटी बसों, मिडी बसों और स्कूल बसों की भी आवाजाही बनी रहती है। प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।

जवाहर मार्ग से प्रभावित प्रमुख बाजार

बायीं तरफ
जाने वाले मार्ग
– नृसिंह बाजार
– सीतलामाता बाजार
– सराफा बाजार
– पीपली बाजार
– राजवाड़ा
– फ्रूट मार्किट
– संजय सेतु
– सैफी चौराहा

दाई ओर जाने
वाले मार्ग
– बंबई बाजार
– मोहनपुरा
– गांधी भवन (कांग्रेस कार्यालय की ओर)
– नंदलालपुरा
– कबूतरखाना
– लोहामंडी

ट्रैफिक दबाव वाले
जवाहर मार्ग के
सात प्रमुख चौराहे

– मालगंज चौराहा
– नृसिंह बाजार
– बंबई बाजार
– यशवंत रोड
– नंदलालपुरा
– संजय सेतु
– सैफी चौराहा