इंदौर, राजेश राठौर। प्रदेश सरकार का बिजली विभाग साल भर में शहरी क्षेत्रों से मीटर रीडर को हटाने की तैयारी कर रहा है। स्मार्ट मीटर से ही बिजली बिल का फैसला होगा। बिजली विभाग ने मीटर रीडर को हटाने का फैसला किया है, हालांकि एक साथ सारे मीटर रीडर नहीं हटाए जाएंगे, लेकिन साल भर में शहरी क्षेत्र में से लगभग सभी मीटर रीडर हटा देंगे। मीटर रीडर की शिकायत रहती है कि उनको बमुश्किल इस काम के लिए आठ से दस हजार मिलते हैं। इस कारण वे गड़बड़ी करते हैं, और लोगों से मौका मिलते ही पैसा भी वसूल लेते हैं।

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वैसे मीटर रीडर को मोबाइल से मीटर रीडिंग की फोटो भी देना पड़ती है। उसके बावजूद शिकायतों में कमी नहीं आ रही है। इसलिए बिजली विभाग स्मार्ट मीटर लगातार लगा रहा है। साल भर में यह काम आधे से ज्यादा होने की उम्मीद है। इसी आधार पर मीटर रीडर को हटाने की बात कही जा रही है। बिजली विभाग के प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी मिलना बाकी है। मीटर रीडर को हटाने के पहले बिजली विभाग को सरकार को बताना पड़ेगा कि कितने स्मार्ट मीटर लगा दिए। उसके बाद ही यह फैसला हो पाएगा।

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मीटर रीडिंग में गड़बड़ी अधीक्षण यंत्री देखेंगे

बिजली विभाग में सहायक यंत्री और उसके ऊपर के अधिकारी बिजली के मीटर रीडिंग में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर बिजली बिल सुधारने का काम देखते थे। अब यह अधिकार सिर्फ उस इलाके के अधीक्षण यंत्री को रहेगा। यह फैसला पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है, हालांकि इसका विरोध हो रहा है, क्योंकि हर छोटे बिल की गलती सुधारने के लिए फाइल अधीक्षण यंत्री तक जाएगी। ऐसे में उपभोक्ताओं को और ज्यादा परेशानी होगी।

हमारी कोशिश है कि गलत बिल ही ना जाए

बिजली विभाग मीटर रीडर को हटाने की तैयारी कर रहा है। जिन इलाकों में स्मार्ट मीटर लगते जा रहे हैं। वहां से मीटर रीडर को हटाते जाएंगे। साल भर में अधिकांश काम पूरा हो जाएगा। हमारी कोशिश है कि उपभोक्ता का बिल गलत नहीं बने। तो फिर उसे सुधारने की ही जरूरत नहीं पड़ेगी। स्मार्ट मीटर लगाने के बाद उपभोक्ताओं की शिकायत भी बंद हो जाएगी।