आबिद कामदार

इंदौर। सुभाषचंद्र बोस की जयंती बड़ी धूम धाम से देश भर में मनाई जाती है, नेताजी की देशभक्ति और उनकी दूरदृष्टि सोंच और साहस ने हमें आजादी दिलाई। नेताजी की जीवनी और उनके बलिदान को शहर के वरिष्ठ साहित्यकार और कवि हरे राम बाजपेई ने अपनी कविता में मोतियों की तरह पिरोया था। उनकी यह कविता 2003 में सीबीएसई के पाठ्यक्रम में शामिल की गई थी।

कविता की कुछ लाईन

धरती सा चौड़ा सीना था, और आसमान सी ऊंचाई।
गंगा जमुना बाहें जिसकी, सागर तट उसकी लंबाई।
ज्वालमुखी जगा दे शब्दों से ऐसा था वाणी में जोश।
भारत मां का अप्रतिम बेटा, नेताजी श्री सुभाषचंद्र बोस।

पश्चिम जोन के सीबीएसई के पाठ्यक्रम में हुई थी शामिल

हरे राम बाजपेई बताते है कि यह कविता सुभाषचंद्र बोस की जीवनी और उनके बलिदान पर आधारित है, उनकी यह कविता सीबीएसई की कक्षा 8 वी के पाठ्यक्रम में शामिल की गई थी। एसबीएसई पांच जोन में बटा है वहीं उनकी यह कविता पश्चिम जोन में शामिल की गई थी। जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश और अन्य राज्य शामिल है।

जयंती की शताब्दी में देवास में पढ़ी थी कविता की कुछ लाइन

सुभाषचंद्र बोस की शताब्दी जयंती थी। मैने कवि सम्मेलन का संचालन किया तो इस कविता की कुछ पंक्तियां पढ़ी। सबने इसको सराहा तो आगे की पंक्तियां लिखकर साहित्य संग्रहालय को भेजी वहा से सीबीएसई के पश्चिम जोन में शामिल कर ली गई। वहीं अहिल्याबाई के ऊपर लिखा आलेख भी कक्षा 7 वी में शामिल हुआ। इसी के साथ कक्षा 3 में भी विद्यालय कविता शामिल हुई।