कॉमनवेल्थ गेम्स में छाए भारतीय पहलवान, 1 पाव घी, 3 लीटर दूध और काजू बादाम का शर्बत है खुराक में शामिल

रेसलर बजरंग पूनिया, दीपक पूनिया और साक्षी मलिक ने फ्री-स्टाइल रेसलिंग में गोल्ड मेडल जीता। इसी के साथ देश के खाते में 3 स्वर्ण पदक और जुड़ गए हैं। पहलवानों की डाइट आम इंसान से काफी विशेष होती है, जिसका पालन सभी के द्वारा बड़े ही अनुशासन के साथ किया जाता है। दूध, दही और अन्य सभी डेयरी प्रोडक्ट्स पहलवानों की डाइट का प्रमुख हिस्सा होते हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) 2022 के 8वें दिन भारतीय पहलवानों (Indian wrestlers) ने देश के नाम के झंडे गाड़े। रेसलर बजरंग पूनिया, दीपक पूनिया और साक्षी मलिक ने फ्री-स्टाइल रेसलिंग में गोल्ड मेडल जीता। इसी के साथ देश के खाते में 3 स्वर्ण पदक और जुड़ गए हैं। कुश्ती भारत में जन्मा प्राचीन खेल है और हमारी इस खेल में महारत होना प्रतिष्ठा का प्रश्न है। हमारे देश के युवा पहलवान इस प्रतिष्ठा को बहुत ही गौरवमयी ढंग से निर्वहन कर रहें हैं।

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खास होती है पहलवानों की डाइट

पहलवानों की डाइट आम इंसान से काफी विशेष होती है, जिसका पालन सभी के द्वारा बड़े ही अनुशासन के साथ किया जाता है। दूध, दही और अन्य सभी डेयरी प्रोडक्ट्स पहलवानों की डाइट का प्रमुख हिस्सा होते हैं। सभी रेसलरों के द्वारा लगभग 2 से 3 लीटर दूध, 200 से 300 ग्राम घी और करीब इतना ही पनीर का सेवन अनिवार्य रूप से किया जाता है। किसी सामान्य इंसान के द्वारा डेयरी प्रोडक्ट्स का इतनी मात्रा में सेवन करना लगभग असम्भव होता है, क्योंकि पहलवानों के द्वारा एक आम इंसान से कई गुना ज्यादा शारीरिक मेहनत की जाती है। इसके साथ ही रेसलर काजू बादाम पिस्ता किशमिश आदि का पेस्ट बनाकर उसमें दूध और पानी मिलाकर बनाया हुआ शर्बत का सेवन भी नियमित रूप से करते हैं, जोकि बहुत ही ज्यादा ऊर्जा प्रदान करने वाला होता है।

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कसरत भी होती है बहुत कठिन

पहलवानों के द्वारा इतनी हाई प्रोटीन डाइट केवल इसी आधार पर ली जाती है कि उनके द्वारा उससे कहीं ज्यादा शारीरिक श्रम कसरत के रूप में किया जाता है। सैकड़ों से हजारों की संख्यां में दंड-बैठक, 8-10 किमी की रनिंग, अखाड़ा खोदना, रस्सा चढ़ना और वेटलिफ्टिंग इन पहलवानों की कसरत का रोज का रूटीन होता है, इसके साथ ही कुश्ती के दांव पेंच और जोर आजमाइश का अभ्यास भी नियमित किया जाता है, जोकि कसरत से भी कहीं अधिक थकाने वाला होता है।