उत्तर प्रदेश में इस बार आंबेडकर जयंती को बेहद भव्य और व्यापक स्तर पर मनाने की तैयारी की गई है। योगी सरकार ने इसे सिर्फ एक स्मृति दिवस तक सीमित न रखते हुए सामाजिक न्याय, जनजागरूकता और जनसंपर्क अभियान के रूप में विकसित किया है।
प्रदेश के सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के जरिए जनप्रतिनिधि सीधे लोगों के बीच जाकर उन्हें उनके अधिकारों, संविधान और समानता के मूल्यों के प्रति जागरूक करेंगे।
हजरतगंज में होगा मुख्य कार्यक्रम
आंबेडकर महासभा परिसर में आयोजित होने वाला मुख्य समारोह आकर्षण का केंद्र रहेगा। महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल के नेतृत्व में कार्यक्रम की शुरुआत बौद्ध भिक्षुओं द्वारा बुद्ध वंदना और अस्थिकलश पर पुष्पांजलि से होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
सरकार ने जयंती से पहले बड़ा फैसला लेते हुए निर्देश दिया है कि प्रदेशभर में स्थापित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर छत्र लगाए जाएंगे। साथ ही उनके आसपास बाउंड्री वॉल और सौंदर्यीकरण का कार्य भी कराया जाएगा। इस फैसले से आंबेडकर अनुयायियों और दलित समाज में उत्साह का माहौल है।
‘आंबेडकरमय’ दिखेगा प्रदेश
प्रदेश के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं में भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें विचार गोष्ठियां, निबंध और भाषण प्रतियोगिताएं शामिल होंगी, जिनके जरिए नई पीढ़ी को बाबा साहब के विचारों और संघर्षों से परिचित कराया जाएगा।
समाज कल्याण विभाग के कार्यालयों, छात्रावासों और शैक्षणिक संस्थानों में भी विशेष आयोजन होंगे। इन कार्यक्रमों में बाबा साहब की प्रतिमा या चित्र पर माल्यार्पण के साथ उनके जीवन, शिक्षाओं और संविधान निर्माण में उनके योगदान पर चर्चा की जाएगी।
मूर्ति विकास योजना को मिली स्वीकृति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ‘डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ को मंजूरी दे चुकी है। इस योजना के तहत प्रदेश की हर विधानसभा में सामाजिक न्याय के महानायकों की प्रतिमाओं और स्मारकों का विकास व सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसके लिए 403 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें संत रविदास, कबीर, महात्मा ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसे महापुरुषों को भी शामिल किया गया है।










