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बिना शोर-शराबे के समाज का काम करते थे रामेश्वर राठौर

राजेश राठौर

तालाबंदी के चलते घर से बाहर भी नहीं निकले। फिर भी कोरोना की चपेट में आ गए। पहले बुखार आया, फिर अस्पताल में भर्ती किया और कोरोना पॉजिटिव आने के बाद हालत बिगड़ती गई। कल रात आखिरी सांस ली।
भक्त प्रहलाद नगर के रामेश्वर राठौर इस कालोनी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। आरटीओ दफ्तर में लाइसेंस और परमिट बनवाने वाले राठौर ने अलग पहचान बना रखी थी। कई बार लोगों से पैसा भी नहीं लेते थे। जब भी कोई कमजोर व्यक्ति मिलता, तो उसकी मदद करते थे। कोई गरीब सड़क पर पैदल दिखता, तो उसे स्कूटर पर आगे छोड़ देते थे।

राठौर रॉयल्स ग्रुप के अध्यक्ष कमल राठौर बताते हैं कि वो हमेशा समाज में अच्छे काम करने के लिए प्रोत्साहित करते थे। छत्रीपुरा थाने पर पदस्थ रहे पुलिस अफसर संजयसिंह राठौर का कहना है कि वे छत्रीपुरा थाने की बाल मित्र योजना का बड़ा हिस्सा थे। बिना प्रचार-प्रसार के लम्बे समय तक वे काम करते रहे और कभी किसी काम का श्रेय लेने की कोशिश नहीं की। सभी को कहते थे कि बिना प्रचार-प्रसार के गुमनाम तरीके से ही समाज की सेवा करना चाहिए। रामेश्वर राठौर की तबीयत जब खराब हुई, तो सबसे पहले सुयश अस्पताल में भर्ती किया गया। उसके बाद उनके सैंपल की रिपोर्ट तीन दिन बाद आई।

तब अरबिंदो अस्पताल में शिफ्ट किया गया। वहां उनका चार दिन से इलाज चल रहा था। पहले दिन से ही सांस लेने में तकलीफ थी। वही उनके लिए मुसीबत बनी। अरबिंदो अस्पताल के डॉक्टरों ने कल शाम लगभग चालीस हजार रुपए का इंजेक्शन परिजनों से मंगाया, लेकिन इंजेक्शन लगाने के पहले ही राठौर ने अंतिम सांस ले ली। आज सुबह पंचकुइया मुक्तिधाम में परिजनों ने अंतिम संस्कार किया। रामेश्वर राठौर को बिना शोर-शराबे के समाज सेवा करने के लिए याद किया जाएगा।