एमपी में राजनीतिक नियुक्तियां हुई शुरू, जयभान सिंह पवैया को वित्त आयोग की मिली कमान, कई आयोगों में अब भी पद खाली

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By Pinal PatidarPublished On: March 20, 2026

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने लंबे समय से इंतजार कर रहे बीजेपी नेताओं को राहत देते हुए निगम, मंडलों और आयोगों में नियुक्तियों का सिलसिला शुरू कर दिया है। यह कदम संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि कई वरिष्ठ नेता लंबे समय से पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे थे।

पहली बड़ी नियुक्ति: जयभान सिंह पवैया को जिम्मेदारी

सरकार ने अपनी पहली राजनीतिक नियुक्ति के तहत वरिष्ठ बीजेपी नेता जयभान सिंह पवैया को छठवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। पवैया पूर्व मंत्री रह चुके हैं और संगठन में उनका लंबा अनुभव रहा है। उनकी नियुक्ति को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

आयोग में अन्य अहम नियुक्तियां

राज्य वित्त आयोग में पवैया के साथ पूर्व आईएएस अधिकारी केके सिंह को सदस्य बनाया जाएगा। वहीं, विधानसभा के पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी वीरेंद्र कुमार को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। वीरेंद्र कुमार राज्य वित्त सेवा के अनुभवी अधिकारी हैं और वित्त विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं।

क्या करता है राज्य वित्त आयोग

राज्य वित्त आयोग का मुख्य कार्य पंचायतों और नगरीय निकायों को मिलने वाली वित्तीय सहायता और संसाधनों के बंटवारे की सिफारिश करना होता है। यह आयोग राज्य द्वारा एकत्रित करों और शुल्कों के वितरण का ढांचा तय करता है, जिससे स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। साथ ही, अनुदान राशि की अनुशंसा भी इसी आयोग के आधार पर तय की जाती है।

समयसीमा और जिम्मेदारियां तय

वित्त विभाग ने आयोग के कार्यों को अधिसूचित कर दिया है। आयोग 1 अप्रैल से शुरू होने वाली आगामी पांच साल की अवधि के लिए काम करेगा और 31 अक्टूबर तक अपनी सिफारिशें राज्यपाल को सौंपेगा। यह प्रक्रिया पंचायत और नगरीय निकायों के वित्तीय हितों को ध्यान में रखते हुए पूरी की जाएगी।

हिम्मत कोठारी का कार्यकाल समाप्त, नई जिम्मेदारी पवैया को

पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह पद लंबे समय से खाली था। अब इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को जयभान सिंह पवैया को सौंपा गया है। राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सहमति से की जाती है।

अन्य आयोगों में अब भी खाली हैं कई पद

मध्यप्रदेश में अभी भी कई महत्वपूर्ण आयोगों में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली हैं। इनमें राज्य महिला आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग और अल्पसंख्यक आयोग शामिल हैं। इन पदों पर नियुक्तियों का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है।

महिला आयोग में लंबित मामले बढ़े

राज्य महिला आयोग में लंबे समय से अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने के कारण हजारों मामलों का निपटारा लंबित है। पिछली नियुक्तियों से जुड़े विवाद और कानूनी अड़चनों के चलते यह आयोग पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है, जिससे महिलाओं से जुड़े मामलों पर असर पड़ा है।

SC-ST आयोगों में भी पद रिक्त

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में भी अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली पड़े हैं। इन आयोगों की भूमिका समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना है, लेकिन नियुक्तियां न होने से इनकी कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।

पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक आयोग में भी इंतजार

पिछड़ा वर्ग आयोग और अल्पसंख्यक आयोग में भी नियुक्तियों की प्रक्रिया लंबित है। सरकार जल्द ही इन पदों पर नए नामों की घोषणा कर सकती है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इन सभी आयोगों में तेजी से नियुक्तियां की जाएंगी, जिससे प्रशासनिक कामकाज में गति आएगी और राजनीतिक संतुलन भी बनेगा।