एक्टर बनना चाहता था, अंगदान ने बनाया ‘रियल हीरो’, अब अहमदाबाद में धड़केगा इंदौर के गौरव का दिल

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By Raj RathorePublished On: July 27, 2026
Gaurav Dave Indore Organ Donation

इंदौर में खजूरी बाजार निवासी 25 वर्षीय गौरव दवे के निधन के बाद उनके परिवार ने ऐसा फैसला लिया, जिसने कई लोगों को नई जिंदगी की उम्मीद दे दी। ब्रेन हेमरेज के बाद ब्रेन डेड घोषित किए गए गौरव के हार्ट, लिवर, दोनों किडनी और आंखें दान की गईं। अंग प्रत्यारोपण के लिए सोमवार को इंदौर में 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

गौरव को 13 जुलाई को अचानक ब्रेन हेमरेज होने पर राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और निर्धारित प्रक्रिया के तहत दो बार मेडिकल परीक्षण के बाद विशेषज्ञों की टीम ने रविवार रात उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

परिवार ने दुख के बीच लिया प्रेरणादायक फैसला

जवान बेटे को खोने के गम के बावजूद गौरव के माता-पिता ने अंगदान के लिए सहमति दी। ब्रेन डेथ की पुष्टि के बाद उनकी बहन वैदेही राठी, बहनोई पल्केश राठी और भाई रितिक चावरे ने परिवार से चर्चा की, जिसके बाद अंगदान का निर्णय लिया गया।

अंगदान की पूरी प्रक्रिया में मुस्कान पारमार्थिक ट्रस्ट के सेवादार जीतू बगानी, संदीपन आर्य और लकी खत्री ने परिवार का सहयोग किया।

हार्ट अहमदाबाद, लिवर-किडनी इंदौर में प्रत्यारोपित

गौरव का लिवर राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती 42 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। उनका हार्ट ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद स्थित यूएन मेहता हॉस्पिटल भेजा गया, जहां 28 वर्षीय युवक को प्रत्यारोपित किया जाएगा।

वहीं, उनकी दोनों किडनियां इंदौर के चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती 22 और 52 वर्ष की दो महिला मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं, जबकि आंखें शंकरा आई बैंक को दान की गईं।

फिल्म इंडस्ट्री में बनाना चाहते थे पहचान

गौरव दवे फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे और अभिनेता बनने का सपना देखते थे। ड्रीम वर्ल्ड मूवीज एंड प्रोडक्शन की एचओडी महक राज ने बताया कि बी.कॉम के बाद गौरव पिछले चार वर्षों से इंडस्ट्री से जुड़े थे। अपनी मेहनत, ईमानदारी और मिलनसार स्वभाव के कारण वे सभी के प्रिय थे।

उन्होंने कहा, “गौरव आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन कई लोगों को नई जिंदगी देकर वे सच्चे मायनों में हीरो बन गए।”

दुर्लभ बीमारी से थे पीड़ित

महक राज के अनुसार, गौरव बचपन से मोया-मोया (Moyamoya) नामक दुर्लभ मस्तिष्क संबंधी बीमारी से पीड़ित थे। उन्हें 13 जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां ब्रेन सर्जरी के दौरान दो स्टेंट लगाए गए। कुछ समय के लिए हालत स्थिर हुई, लेकिन बाद में उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई और वे दोबारा होश में नहीं आ सके।

मुस्कान पारमार्थिक ट्रस्ट के संदीपन आर्य ने कहा कि दवे परिवार ने अपने व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठकर जो निर्णय लिया है, वह समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।