नीट पेपर लीक को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि छात्र आंदोलन शुरू होने के पहले ही दिन धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद छोड़ने की पेशकश कर दी थी, लेकिन उस समय भाजपा नेतृत्व ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था।
इंदौर में मीडिया से चर्चा के दौरान विजयवर्गीय ने दावा किया कि बाद में जब पार्टी ने परिस्थितियों की समीक्षा की और निर्णय लिया, तब धर्मेंद्र प्रधान ने तत्काल इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि प्रधान ने अपने पूरे कार्यकाल में हर जिम्मेदारी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाई।
‘पहले दिन ही इस्तीफे की पेशकश की थी’
कैलाश विजयवर्गीय के मुताबिक, छात्र आंदोलन शुरू होते ही धर्मेंद्र प्रधान ने भाजपा अध्यक्ष से कहा था कि यदि पार्टी उचित समझे तो वह शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने उस समय उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि इस मुद्दे पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, इसलिए न तो इस्तीफा दें और न ही इस विषय पर सार्वजनिक चर्चा करें।
उन्होंने दावा किया कि बाद में जब पार्टी ने परिस्थितियों को देखते हुए फैसला लिया, तब धर्मेंद्र प्रधान ने बिना किसी देरी के अपना इस्तीफा सौंप दिया।
विदेशी ताकतों की साजिश
विजयवर्गीय ने दावा किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उन विदेशी ताकतों की योजना को विफल करने वाला कदम साबित हुआ, जो हिंसा फैलाकर भारत को अस्थिर करना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं पहले बांग्लादेश और श्रीलंका में भी देखने को मिली हैं।
उन्होंने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने उन विदेशी ताकतों की साजिश को नाकाम कर दिया, जो हिंसा के जरिए भारत को अस्थिर करना चाहती थीं।”
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष ऐसे जश्न मना रहा है, जैसे पड़ोसी के घर बेटे के जन्म पर ढोल बजा रहा हो। उन्होंने सवाल उठाया कि छात्र आंदोलन के दौरान कांग्रेस की वास्तविक भूमिका क्या थी।
विजयवर्गीय ने दावा किया कि आंदोलन छात्रों ने शुरू किया था और कांग्रेस बाद में उनके पीछे खड़ी दिखाई दी। साथ ही उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद विपक्ष पूरी तरह निराश था और उसी दौरान उसे सीजेपी के रूप में उम्मीद की एक किरण दिखाई दी। उन्होंने यह भी सवाल किया कि छात्र आंदोलन के दौरान क्या किसी कांग्रेस नेता के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की थी।










