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विपक्षी दलों की बैठक में बोली सोनिया- कोरोना को लेकर सरकार हर मोर्चे पर फेल

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते देश में लगातार गिर रही अर्थव्यवस्था और मजदूरों की स्थिति को लेकर कांग्रेस मोदी सरकार को लगातार गिरने में जुटी हुई है। इसी के चलते आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्षी दलों की बैठक बुलाई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में 12 दलों के नेता शामिल हुए। इस दौरान नेताओं ने देश में लाॅक डाउन लगाने, उसे बढ़ाने और जनता को राहत दिए जाने के तरीकों पर सवाल उठाए। वहीं सोनिया गांधी ने आर्थिक पैकेज को देश के साथ क्रूर मजाक कहां है।

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा ने कहा कि भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला आने से पहले ही देश की अर्थव्यवस्था डाउन थी। केंद्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी और त्रुटि पूर्ण जीएसटी इसके मुख्य कारण थे। उन्होंने कहा कि 2017-18 के दौरान आर्थिक गिरावट शुरू हुई 7 तिमाही तक अर्थव्यवस्था का लगातार गिरना सामान्य था लेकिन केंद्र सरकार गलत नीतियों के साथ आगे बढ़ती रही।

सोनिया गांधी ने कहा कि 11 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को वैश्विक महामारी घोषित कर दिया था। साथ ही पूरे विपक्ष ने सरकार को सहयोग देने का भी आश्वासन दिया था, वहीं 24 मार्च को केवल 4 घंटे के नोटिस में लाॅकडाउन घोषित कर दिया गया, इसका भी हमने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कोरना के 21 दिन में ठीक होने को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा लगाया गया अंदाजा भी गलत साबित हुआ।

कांग्रेस नेत्री ने ऐसा लगता है जब तक कोई वैक्सीन विकसित नहीं हो जाती है तब तक कोरोना वायरस रहेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लाॅक डाउन के मानदंडों को लेकर भी निश्चित नहीं थी। साथ ही सरकार के पास इसे खत्म करने को लेकर कोई योजना नहीं है कोरोना की जांच और जांच किट के आयात को लेकर भी केंद्र सरकार फेल रही है।

अम्फान घोषित हो राष्ट्रीय आपदा

वहीं चक्रवाती तूफान अम्फान के चलते पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में हुई तबाही पर भी शोक व्यक्त किया गया और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए मौन रखा गया। विपक्षी दलों ने केंद्र से आग्रह किया कि ‘दोनों राज्यों के लोगों को सरकारों एवं देशवासियों से तत्काल मदद और एकजुटता की जरूरत है। विपक्षी पार्टियां केंद्र सरकार से आग्रह करती हैं कि इसे तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और फिर इसी के मुताबिक राज्यों को मदद दी जाए।’

विपक्षी नेताओं ने कहा, ‘फिलहाल राहत और पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। परंतु इस आपदा के परिणामस्वरूप कई दूसरी बीमारियां पैदा होने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए हम केंद्र सकार का आह्वान करते हैं कि वह दोनों राज्यों के लोगों की मदद करे।’

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