मध्य प्रदेश

अब मात्र 10 सेकंड में भर सकेंगे बिजली बिल

इंदौर। मप्रपक्षेविविकं के युवा इंजीनियरों ने नेक्स्ट जनरेशन बिलिंग सॉफ्टवेयर बनाया है। यह सॉफ्टवेयर उतना ही प्रभावी हैं जितना नामी कंपनियों का सॉफ्टवेयर करोड़ों की फीस पर उपयोग करना पड़ता है। मप्रपक्षेविविकं के स्वयं के सॉफ्टवेयर से अब सभी तकनीकी काम व सर्वर डेटा संबंधी रिकार्ड पोलोग्राउंड में ही होने से काम अत्यंत तेज होगा। मोबाइल पर बिजली बिल मात्र दो सेकंड में खुलेगा। 10 सेकंड में बिल भरा जा सकेगा।

मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक विकास नरवाल ने बताया कि इंदौर शहर के साउथ डिविजन के एक लाख से ज्यादा बिल एनजीबी सॉफ्टवेयर से बन चुके है। शेष चारों डिविजन इंदौर इस्ट, इंदौर वेस्ट, इंदौर सेंट्रल , इंदौर नार्थ के बिलों संबंधी डाटा नए सॉफ्टवेयर में माइग्रेट हो रहा है। मई की बिजली खपत नए सॉफ्टवेयर में ही अपलोड होगी, जून में शहर के सभी 6.30 लाख उपभोक्ताओं को नए सॉफ्टवेयर से ही बिजली बिल मिलेंगे।

नरवाल ने बताया कि यह साफ्टवेयर तेजी से काम करता हैं, साथ ही बिजली बिलों में उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद होने वाले संशोधन में तत्काल अद्यतन हो जाएंगे। स्थानीय सर्वर पर ही सभी कार्य होने से कार्य तेज होगा। पहले ऊर्जस एप और कंपनी के पोर्टल पर बिजली का बिल 8 से 10 सेकंड में खुलता था, अब नए सॉफ्टवेयर होने से मात्र 2 सेकंड मेें बिल खुल रहा है। नरवाल ने बताया कि सभी उपभोक्ताओं को नए सॉफ्टवेयर मेंं डाटा पहुंचने के बाद अंग्रेजी अक्षर एन से 10 अंकों वाले आईवीआरएस नंबर प्राप्त हो रहे है।

उपभोक्ता ऊर्जस एवं कंपनी के पोर्टल पर जैसे ही पुराने आईवीआरएस नंबर डालेगा, उसे नए एन से प्रारंभ होने वाले नंबर मिल जाएंगे। इस संबंध में सभी उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी एसएमएस से भी सूचित कर रही है। नरवाल ने बताया कि इस साफ्टवेयर के बनने से न केवल पश्चिम क्षेत्र बल्कि पूरे मप्र की कंपनियों को सालाना करोड़ों की बचत होगी, क्यों कि राज्य की अन्य दोनों वितरण कंपनियों ने भी इसका उपयोग प्रारंभ किया है। अभी यह राशि लायसेंस शुल्क के रूप में बिलिंग साफ्टवेयर वाली प्रायवेट कंपनी की चुकाना पड़ती थी। प्रबंध निदेशक नरवाल ने बताया कि कंपनी का प्रयास हैं कि आगामी माहों में हम सालभर के बिल एवं सालभर के बिजली खाते यानि लेन- देन की पासबुक भी उपलब्ध कराएंगे।

रीडिंग के बाद राशि समायोजन होगा

नरवाल ने बताया कि वर्तमान में बिल पुराने डाटा के हिसाब से ही बन रहे है। लॉकडाउन खत्म होने या फिर रीडिंग की छूट मिलने पर वास्तविक रीडिंग से बिजली खातों का मिलान होगा। यदि उपभोक्ता की वास्तविक खपत बिजली बिल में दर्ज खपत से कम मिली तो राशि का समायोजन भी किया जाएगा।