मध्य प्रदेश

जून की जगह जुलाई में हो 12वीं की परिक्षा

 

इंदौर। राज्य सरकार ने कक्षा 10वीं के परीक्षार्थियों को शेष पेपर में जनरल प्रमोशन देकर 12वीं कक्षा की परीक्षा के शेष पेपर 9 जून से लिए जाने घोषणा की है। इसे लेकर 12वीं के प्रदेश के लाखों परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों में चिंता व्याप्त है। कोरोना संक्रमण के संभावित अनुमानों को लेकर वे भयभीत हैं। बेहतर होगा कि ये परीक्षा सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर जुलाई में कराई जाए, जिससे भय का वातावरण निर्मित न हो!

मांग मध्यप्रदेश खनिज विकास निगम के पूर्व उपाध्यक्ष श्री गोविन्द मालू ने मुख्यमंत्री शिवराजसिहंजी से की है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश से कोरोना महामारी से उपजे संकट से प्रदेश के हर वर्ग को उबारने में रात-दिन लगे हैं। 12वीं के विद्यार्थियों को जनरल प्रमोशन न देने का फैसला सही है। क्योंकि, भविष्य में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के मद्देनजर वर्तमान परिस्थिति में कक्षा 12वी के परीक्षा परिणाम को ही आधार बनाया जाता! इसलिए शेष बचे पेपरों परीक्षा लेना सही निर्णय है और 12वीं का परीक्षा परिणाम सभी विषयों के पेपरों की परीक्षा के मूल्यांकन के बाद ही जारी किया जाएगा। केंद्रीय सरकार सीबीएसई, आईएसई और अन्य परीक्षाएं भी जुलाई माह में आयोजित कर रही है। इसी तरह प्रदेश सरकार भी शेष बचे विषयों की परीक्षा जुलाई माह में आयोजित कर लाखों परीक्षार्थियों व उनके अभिभावकों को राहत दे सकता है।
लाखों विद्यार्थियों को महामारी के इस दौर में जान जोखिम में डालकर परीक्षा केंद्रों तक जाना होगा। साथ ही हजारों शिक्षक भी जिन्हें परीक्षा में ड्यूटी देने के लिए बुलाया जाएगा, उनके लिए भी कार्रवाई जोखिम भरी होगी। महामारी की परिस्थितियों में 2020-21 का शिक्षण सत्र प्रभावित हुआ है। ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा रहा है कि जून-जुलाई माह से प्रारंभ होने वाला शिक्षण सत्र अगस्त-सितम्बर माह से पहले प्रारंभ होना मुश्किल है। ऐसी परिस्थिति में यदि 12वीं की परीक्षा जुलाई माह में आयोजित की जाती है, तो भी आगामी शिक्षण सत्र के प्रारंभ होने के पूर्व परीक्षा परिणाम जारी होने की संभावना है। अतः बेहतर होगा कि जून के स्थान पर जुलाई में शेष बचे पेपरों की परीक्षा आयोजित की जाए।