मध्य प्रदेश

लॉकडाउन: पश्चिमी रेलवे को एक हजार करोड़ का घाटा, इंदौरी हवाई यात्रियों के फंसे 15 करोड़

इंदौर। पिछले दो महीने से लॉकडाउन के चलते रेल हवाई सेवा पूरी तरह से ठप है। इसी बीच दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को उन्हें घर पहुंचाने के लिए श्रमिक ट्रेने चलाई जा रही है। हालांकि ट्रेनें बंद होने से पश्चिमी रेलवे को ही एक हजार करोड़ रुपए से अधिक का घाटा हुआ है। वहीं 282 करोड़ रुपए की रिफंड राशि वापस की जा रही है।

पश्चिमी रेलवे का ही दावा है कि 1030 श्रमिक ट्रेनों से 15 लाख से ज्यादा मजदूरों को उनके गंतव्यों तक पहुंचा दिया। डेढ़ लाख से अधिक मास्क और 20 हजार लीटर से ज्यादा सेनेटाइजर भी खुद निर्मित किया। वहीं कोरोना संकट के बीच उड़ानें शुरू करने और रद्द करने का सिलसिला भी जारी है। ऐसे में पिछले दो माह में ही इंदौरी हवाई यात्रियों के 15 करोड़ रुपए से ज्यादा फंसे हैं, जिसको रिफंड करने की मांग यात्रियों के अलावा ट्रेवल एजेंट एसोसिएशन ने भी विमान कम्पनियों से की है।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री रविन्द्र भाकर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 25 मई, 2020 तक लॉकडाउन अवधि के दौरान पश्चिम रेलवे के डिवीजनों और कारखानों द्वारा 1.59 लाख मास्क और 20 हजार लीटर से अधिक सैनिटाइजऱ तैयार किये गये हैं। पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल डिवीजन ने सर्वाधिक 42 हजार मास्क बनाये। उसके बाद दाहोद वर्कशॉप ने 39700 और रतलाम डिवीजन ने 37130 मास्क बनाये। रतलाम डिवीजन ने सबसे अधिक मात्रा में 10100 लीटर सैनिटाइजऱ तैयार किया। मुंबई सेंट्रल ने 3136 लीटर और दाहोद कारखाने ने 2080 लीटर सैनिटाइजऱ तैयार किया। अहमदाबाद डिवीजन ने 13096 मास्क और 2134 लीटर सैनिटाइजऱ, वडोदरा डिवीजन ने 8407 मास्क, लोअर परेल वर्कशॉप ने 6600 मास्क और 410 लीटर सैनिटाइजऱ, भावनगर डिवीजऩ ने 5492 मास्क और 215 लीटर सैनिटाइजऱ, भावनगर वर्कशॉप ने 2715 मास्क और 215 लीटर सैनिटाइजऱ, राजकोट डिवीजऩ ने 2000 मास्क और 2000 लीटर सैनिटाइजऱ, महालक्ष्मी कारखाने ने 970 मास्क और 60 लीटर सैनिटाइजऱ और प्रताप नगर कारखाने ने 850 मास्क और 285 लीटर सैनिटाइजऱ तैयार किया है। इन मास्कों और सैनिटाइजऱ का उपयोग डिवीजनों और कार्यशालाओं में किया जा रहा है। पश्चिम रेलवे ने 2.5.2020 से 25.5.2020 तक कुल 1030 श्रमिक विशेष ट्रेनों का परिचालन किया है, जिन्होंने 15,31,574 यात्रियों को उनके इच्छित गंतव्यों तक पहुंचाया है। 25 मई, 2020 को, पश्चिम रेलवे ने 59 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया, जिनमें गुजरात से 47 और महाराष्ट्र से 12 ट्रेनें शामिल हैं। 9192 मालगाडिय़ों को अन्य रेलवे के साथ जोड़ा गया, जिनमें 4620 ट्रेनें सौंपी गईं और 4572 रेलगाडिय़ों को विभिन्न इंटरचेंज पॉइंट पर ले जाया गया। पार्सल वैन / रेलवे दुग्ध टैंकरों (आरएमटी) के 272 मिलेनियम पार्सल रेक को आवश्यक सामग्री जैसे दूध पाउडर, तरल दूध, चिकित्सा आपूर्ति और अन्य सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं की मांगों का सामना करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा गया है।

पश्चिम रेलवे पर कुल आय में लॉकडाउन के कारण अनुमानित नुकसान कुल 1031.38 करोड़ रुपये रहा है। इसके बावजूद, अब तक टिकटों के निरस्तीकरण के परिणामस्वरूप, पश्चिम रेलवे ने 282.56 करोड़ रुपये की रिफंड राशि वापस करना सुनिश्चित किया है। गौरतलब है कि इस रिफंड राशि में, अकेले मुंबई डिवीजन ने 135.38 करोड़ रुपये का रिफंड सुनिश्चित किया है। अब तक, 43.33 लाख यात्रियों ने पूरे पश्चिम रेलवे पर अपने टिकट रद्द कर दिए हैं और तदनुसार अपनी रिफंड राशि प्राप्त की है। दूसरी तरफ 25 मई से घरेलू उड़ानें शुरू की गई। मगर पहले ही दिन कई उड़ानें निरस्त कर दी। वहीं दूसरी तरफ 25 मार्च से लेकर 25 मई तक जब पूरी तरह से उड़ानें बंद थीं उस दौरान 22 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मध्यप्रदेश के ही हवाई यात्रियों की रिफंड की थी, जिसमें से 15 करोड़ रुपए से अधिक की राशि इंदौर के हवाई यात्रियों की ही है।

फेडरेफशन ऑफ इंडिया ट्रेवल एजेंट मध्यप्रदेश के चेयरमैन पी.के. जोष का कहना है कि एयर इंडिया सहित सभी विमान कम्पनियों को कहा गया है कि वह जल्द ही रिफंड की राशि हवाई यात्रियों को वापस लौटाए, क्योंकि इसमें एक बड़ी राशि ट्रेवल एजेंटों की भी फंसी है। अब विमान कम्पनियां राशि रिफंड करने की बजाय अगले महीनों में यात्रा करने का विकल्प देने लगी है, लेकिन श्री जोष का कहना है कि अभी कोरोना संक्रमण के चलते कोई भी अत्यावश्यक कार्य के अलावा हवाई यात्रा नहीं करेगा। लिहाजा विमान कम्पनियों को जल्द ही रिफंड करना चाहिए।