इंदौर में हुआ बड़ा खेला, अस्पताल बना ही नहीं लेकिन उसमें 6 साल से 87 लोगों का स्टाफ कर रहा काम

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By Raj RathorePublished On: July 3, 2026
Indore Government Hospital Scam

मध्य प्रदेश के इंदौर में सरकारी व्यवस्था का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। खजराना में छह साल पहले घोषित 100 बिस्तरों वाला सिविल अस्पताल आज तक केवल सरकारी फाइलों में ही मौजूद है। अस्पताल के लिए न भवन बना और न ही जमीन उपलब्ध हो सकी, लेकिन इसके बावजूद वर्षों से डॉक्टरों और कर्मचारियों की पोस्टिंग तथा तबादले लगातार किए जा रहे हैं।

23 जून 2020 को राज्य सरकार ने खजराना में 100 बेड के सिविल अस्पताल को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टर, मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट समेत कुल 87 पद भी स्वीकृत कर दिए गए थे। हालांकि छह साल बीतने के बाद भी अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं हो पाया, क्योंकि अब तक इसके लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है।

अस्पताल नहीं, फिर भी जारी हैं पोस्टिंग

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल अस्तित्व में नहीं होने के बावजूद उसके नाम पर कर्मचारियों की नियुक्ति और तबादले लगातार किए जा रहे हैं। 15 जून 2026 को भी एक लैब टेक्नीशियन की पोस्टिंग सिविल अस्पताल खजराना के नाम पर की गई। चूंकि अस्पताल का भवन नहीं है, इसलिए स्वीकृत कर्मचारियों को फिलहाल पीसी सेठी अस्पताल, हुकुमचंद अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं देने के लिए अटैच किया गया है।

खजराना, मुसाखेड़ी, तेजाजी नगर, बिचौली हप्सी और आसपास के क्षेत्रों की तीन लाख से अधिक आबादी आज भी सरकारी इलाज के लिए एमवाय अस्पताल, एमटीएच और जिला अस्पताल पर निर्भर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल समय पर बन गया होता तो क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलतीं और बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी कम होता।

स्वास्थ्य मंत्री ने दी सफाई

उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि शुरुआत में यहां अर्बन पीएचसी थी, जिसे बाद में सिविल अस्पताल में अपग्रेड किया गया। निर्माण इसलिए शुरू नहीं हो सका क्योंकि जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि स्वीकृत पद पोर्टल पर दर्ज हैं और पैरामेडिकल स्टाफ को आवश्यकता के अनुसार अन्य सरकारी अस्पतालों और संजीवनी क्लीनिकों में अटैच किया जा सकता है। सरकार उपयुक्त जमीन की तलाश कर रही है और उपलब्ध होते ही अस्पताल का निर्माण शुरू किया जाएगा।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में सरकारी जमीन उपलब्ध कराने में समय लग रहा है। जमीन का कब्जा नहीं मिलने के कारण निर्माण शुरू नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि स्वीकृत कर्मचारियों का उपयोग फिलहाल जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और 84 संजीवनी क्लीनिकों में किया जा रहा है। इनमें अधिकांश केंद्रों पर मेडिकल ऑफिसर के साथ आउटसोर्स स्टाफ और नर्सिंग कर्मियों की तैनाती की गई है।