इंदौर के केसरबाग में चातुर्मास के लिए ठहरे 80 वर्षीय जैन संत का बुधवार रात निधन हो गया। इसके बाद अनुयायियों ने गुरुवार सुबह केसरबाग स्थित विद्यासागर उद्यान में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया।
उद्यान में अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर कॉलोनी के कुछ रहवासियों ने नाराजगी जताई और पुलिस व नगर निगम को इसकी सूचना दी।
पुलिस से अनुमति नहीं मिली, फिर भी उद्यान में किया अंतिम संस्कार
जानकारी के मुताबिक, जैन संत करीब 15 दिन पहले चातुर्मास के लिए केसरबाग में रुके थे। उनकी तबीयत पहले से खराब थी। बुधवार रात तबीयत बिगड़ने के बाद उनका निधन हो गया। इसके बाद समाज के लोगों ने मुक्तिधाम के बजाय कॉलोनी के उद्यान में ही अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।
बताया गया कि अंतिम संस्कार के लिए अनुमति लेने समाज के कुछ लोग थाने भी पहुंचे थे। पुलिस अधिकारियों ने सार्वजनिक उद्यान होने का हवाला देते हुए अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद गुरुवार सुबह उद्यान में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सुबह चिता जलती देख रहवासियों ने दी सूचना
सुबह उद्यान में रोजाना की तरह महिलाएं और बच्चे पहुंचते हैं, जबकि कई लोग ट्रैक पर मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं। इसी दौरान लोगों ने उद्यान में चिता जलती देखी और पुलिस व नगर निगम अधिकारियों को सूचना दी।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और विवाद को शांत कराने की कोशिश की। अधिकारियों के पहुंचने तक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
नगर निगम का है उद्यान
विद्यासागर उद्यान नगर निगम के अधीन है। उद्यान में अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी रहवासियों ने नगर निगम अधिकारियों को भी दी है। रहवासियों का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग के उद्यान में इस तरह अंतिम संस्कार किया जाना उचित नहीं है।
वहीं, समाजजनों की ओर से कहा गया है कि चिता पूरी तरह ठंडी होने के बाद उद्यान के संबंधित हिस्से की साफ-सफाई करवा दी जाएगी।










