मध्य प्रदेश

क्लॉथ मार्केट कॉलेज के प्राचार्य की सलाह, नहीं खोले जाए स्कूल-कॉलेज

इंदौर: कोरोना वायरस पूरी दुनिया में कहर बरपा रहा है। अब भारत में भी यह संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। दुनिया भर के कई छोटे-बड़े इससे निपटने के लिए अपने-अपने तरीके अपना रहे हैं। कहीं लॉकडाउन, कहीं कर्फ्यू, कहीं क्वॉरेंटाइन, सभी अपने-अपने स्तर पर इसके रोकथाम के प्रयास कर रहे हैं लेकिन अभी तक कोरोना वायरस के खिलाफ कोई सफलता नहीं मिल पाई है।

देश में लगे लॉकडाउन के चलते सभी शिक्षण संस्थान बंद है। अब केंद्र ने 15 अगस्त से स्कूल कॉलेज खोलने की बात कही है। ऐसे में कई राज्य इन्हें खोलने के पक्ष में है तो कई राज्य इस पक्ष में नहीं है। सवाल यह है कि जब शिक्षण संस्थाएं बंद है तो परीक्षाएं क्यों करवाई जा रही हैं? जिम्मेदार लोग भी विद्यार्थी जीवन से गुजरे हैं और यह भली प्रकार जानते हैं कि किसी भी परीक्षा में सभी विद्यार्थी सामाजिक दूरी का पालन करें ऐसा संभव नहीं है।

परीक्षा शुरू होने और खत्म होने के बाद विद्यार्थी अलग-अलग समूह में होते हैं और परीक्षा संबंधी चर्चा करते हैं। देश में कोई शिक्षण संस्थान किसी हालत में उस अवस्था में उन्हें सामाजिक दूरी के लिए निर्देशित नहीं करता है। इसके अलावा परीक्षा के द्वारा विद्यार्थी की टेबल पर जाकर उसे उत्तर पुस्तिकाएं और प्रश्न पेपर देना होता है। कई बार विद्यार्थी के पास जाकर हस्ताक्षर लेना और करना होते हैं। ऐसे में न जाने कितने हाथों से गुजरे हुए कागजों का खुला आदान-प्रदान होता है।

पेयजल, वॉशरूम, टेबल कुर्सियां, दरवाजे, फर्नीचर सब कुछ तो शिक्षण संस्थानों में सब के उपयोग के लिए ही होता है। देश का कोई भी शिक्षण संस्थान उतना सैनिटाइजेशन नहीं कर सकता जैसा संक्रमण से बचाव के लिए अपेक्षा है। यदि पूरे परीक्षा केंद्र पर एक भी व्यक्ति संक्रमित हुआ तो वह पूरे केंद्र को एक ही दिन में संक्रमित करने की ताकत रखता है।

ऐसी स्थिति में इंदौर क्लॉथ मार्केट कॉलेज के प्राचार्य और जाने-माने शिक्षाविद डॉ मंगल मिश्र ने स्कूल कॉलेज नहीं खोलने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने उक्त कई कारण भी बताए हैं। इसके साथ ही कुछ सुझाव भी दिए हैं-

  • द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थी को गत वर्ष के आधार पर प्रमोशन देना।
  • विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर कक्षोन्नत करना
  • 50% अंक गत वर्ष के आधार पर और 50% आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर कक्षोन्नत करना।
  • होम असाइनमेंट देना, ओपन बुक परीक्षा करना जिसमें ऐसे प्रश्न पूछे जाएं जो सीधे-सीधे पुस्तकें पढ़कर हल ना हो सके।
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा खुला साक्षात्कार लेकर उसके अंक देना तथा वीडियो रिकॉर्डिंग विश्वविद्यालय में जमा कराना।
  • साधन संपन्न संस्था होने पर ऑनस्क्रीन वस्तुनिष्ठ प्रश्नों द्वारा मूल्यांकन करना, आदि।
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