सीएम कहते है कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करते… कलेक्टर-कमिश्नर की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सीएस के बयान से मचा बवाल

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By Abhishek SinghPublished On: January 22, 2026

मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कुछ जिलों में कलेक्टरों के खिलाफ बढ़ती शिकायतों को लेकर कड़ी चिंता जताई है। बुधवार को आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की दूसरी समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन में कोई भी गतिविधि छिपी नहीं रहती और हर मामले की पूरी जानकारी उनके पास रहती है।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में होने वाली हर प्रशासनिक गतिविधि पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की निगरानी रहती है। चाहे कलेक्टर कोई नवाचार करें या किसी तरह के भ्रष्टाचार में शामिल हों, इसकी जानकारी सीधे पीएमओ तक पहुंचती है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री भी कलेक्टरों की सभी कार्रवाइयों से वाकिफ रहते हैं।

कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता

मुख्यमंत्री बार-बार यह कहते रहे हैं कि बिना पैसे लिए कलेक्टर कोई काम नहीं करता। उन्होंने ने कहा की हर काम पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ होना चाहिए। इसलिए कलेक्टरों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने आचरण में संयम और अनुशासन बनाए रखें और ऐसी परिस्थितियों से बचें, जो शिकायतों का कारण बन सकें।

भ्रष्टाचार से रहें दूर

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि उन्हें भ्रष्टाचार से पूरी तरह दूरी बनाकर शासन की प्राथमिकताओं और आम जनता के हित में कार्य करना चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ जिलों से मिली शिकायतें सीधे उनके और मुख्यमंत्री के पास पहुंच चुकी हैं, इसलिए उन्हें समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।

कलेक्टरों की हर कार्रवाई पर पीएमओ की नजर

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टरों को अवगत कराया कि प्रधानमंत्री कार्यालय उनकी प्रत्येक प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रखता है। उन्होंने कहा कि कलेक्टरों द्वारा किए गए नवाचारों की वास्तविक प्रभावशीलता तक का आकलन भी पीएमओ के स्तर पर किया जाता है। जैन ने बताया कि यह जानकारी मुख्यमंत्री को एक अन्य राज्य के मुख्यमंत्री के सलाहकार के माध्यम से मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कलेक्टरों के कार्यों की निगरानी कितनी व्यापक है।

मुख्य सचिव ने आगे कहा कि कलेक्टरों के फैसलों और कार्यशैली पर केवल प्रदेश के भीतर ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी भी नजर रखते हैं। वहां से मिलने वाली प्रतिक्रियाएं कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने लाती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ जिलों से जुड़ी शिकायतें सीधे उनके और मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी हैं, इसलिए अधिकारियों को समय रहते आवश्यक सुधार कर लेने चाहिए।