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MP : मौसम बिगड़ने पर बिजली आपूर्ति सुधारने के लिए गठित होंगे क्राइसेस मैनेजमेंट ग्रुप

इंदौर। प्राकृतिक कारणों विशेषकर तेज हवा, तूफान, मूसलधार वर्षा आदि में बिजली आपूर्ति बधित होने पर तेजी से सुधार कार्य कराया जाएगा। इसके लिए जोन स्तर पर क्राइसेस मैनेजमेंट ग्रुप बनाए जाएंगे। इस ग्रुप में तीन से पांच कर्मचारी होंगे। डिविजन स्तर पर इसके लिए नोडल अधिकारी तैनात रहेंगे।

मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक श्री संतोष टैगोर ने बताया कि प्रबंध निदेशक श्री विकास नरवाल के निर्देशानुसार इन ग्रुपों की तैयारी की जा रही है। जून से बारिश का दौर प्रारंभ होने वाला हैं, इसके लिए मई अंत तक सभी ग्रुप सक्रिय हो जाएंगे। इन ग्रुपों के पास संबंधित जोन की बिजली लाइनों, भौगोलिक स्थितियों, ट्रांसफार्मर, ग्रिड की जानकारी रहेगी। साथ ही उपभोक्ताओं को नंबर भी रहेंगे। ये ग्रुप मौसम विभाग को पूर्वानुमान की जानकारी रखेंगे, साथ ही जोन पर आपूर्ति संबंधी परेशानी आने पर यथासंभव जल्दी समाधान होने एवं इस कार्य की अपडेट देते रहेंगे। श्री टैगोर ने बताया कि प्रत्येक डिविजन पर संबंधित जोन के ग्रुप कर्मचारियों की ट्रैनिंग भी मई में ही पूर्ण करा दी जाएगी। ये ग्रुप 1912 काल सेंटर, ऊर्जस एप, बिजली कंपनी के पोर्टल से भी लाइव रहेंगे, ताकि वहां से मिलने वाली समस्याएं , शिकायतों पर भी तुरंत संज्ञान लेकर उपभोक्ताओं को तेजी से राहत पहुंचाई जा सके।

हर फीडर से बिजली आपूर्ति की रोज मानिटरिंग होगी

विकास नरवाल ने सभी इंजीनियरों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक फीडरों पर आपूर्ति ठीक से हो। मौसमी कारणों व अत्यंत जरूरी कार्यों के लिए मैंटेनेंस के अलावा आपूर्ति बाधित नहीं होना चाहिए। शुक्रवार को आपूर्ति संबंधी समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले के अधीक्षण यंत्री जिले के सभी फीडरों पर की जा रही आपूर्ति की रोज समीक्षा करे। कृषि फीडरों पर नियमानुसार 10 घंटे एवं अन्य फीडरों पर 24 घंटे आपूर्ति की जाए। यहां कही कोई कमी हो तो उसे समय रहते पूरा किया जाए। नरवाल ने कार्यपालक निदेशक श्री गजरा मेहता को निर्देश दिए कि सभी जगह बिजली गुणवत्ता के साथ दी जाए। उपभोक्ता संतुष्टी की दिशा में भी पूरा ध्यान दिया जाए। गजरा मेहता ने बताया कि कंपनी स्तर पर 33 केवी के 872 एवं 11 केवी के 6528 फीडरों से आपूर्ति हो रही हैं, ब्रेक डाउन का स्तर 0 रखने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। जिस फीडर पर फाल्ट हो रहा हैं, वहां तुरंत सुधारा जा रहा हैं, बार-बार शिकायत आने पर संबंधित इंजीनियरों को नोटिस भी दिया जाता है।