वाकई पटवा जी मुझे भी याद आते हैं

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सुरेंद्र बंसल

शुक्ल जी आपने सही तौर पर स्मरण कर पटवा जी के व्यक्तित्व का मुझे भी स्मरण करवा दिया।यूँ पत्रकार की हैसियत से कड़क हुआ व्यक्ति कब किसे याद करता है लेकिन अपने को पटवा जी याद आते हैं। बात उन दिनों की है जब मैं जनसत्ता के लिए इंदौर संभाग कवर करता था। किसी मसले पर अखबारों में पटवा जी घेर लिए गए थे, मामला गरम था , इसी बीच उनका इंदौर आना हुआ। जाहिर है पत्रकारों से बात होना थी और सवाल जवाब भी उसी मामले पर होना थे।इंदौर के जावरा कम्पोउंड स्थित बीजेपी कार्यालय में उन्होंने अपनी बात बहुत स्पष्टता से कही, अखबारों में बहुत कुछ छपा लेकिन पटवा जी उससे निकलने के बजाय और उलझ गए , बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी उनसे सवाल किए, पटवा जी ने कहा उन्होंने ऐसा कुछ इंदौर में नहीं कहा है, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने जनसत्ता में मेरी छपी खबर आगे कर दी और कहा जो मैंने इंदौर में कहा है

वह यह सही है…पटवा जी उस मसले से उभर गए, और इस अहसान को वह नहीं भूले, तबके मीडिया प्रभारी गोविंद मालू को फोन कर उन्होंने मेरी रिपोर्टिंग की तारीफ की और कहा जनसत्ता में छपी खबर से मुझे ज्यादा सफाई नहीं देना पड़ी। उन्होंने कहा कि जब मैं इंदौर आऊँ मुझे सुरेन्द्र बंसल से मिलवाईयेगा। हालांकि अपन उनसे अपनी आदत अनुसार नहीं मिले क्योंकि प्रभाष दा के दिए पत्रकारीय संस्कार अपने को यह अहसास करवाते थे कि जब अपने कर्तव्य पर हो तो किसी पुरस्कार की प्रतीक्षा मत करो ।

इसी से याद आया वर्तमान में मुख्य सचिव पद के प्रबल दावेदार वरिष्ठ आईएएस सुधीरंजन मोहंती इंदौर कलेक्टर थे साथ में वर्तमान बीजेपी नेता रुस्तम सिंह जिले के पुलिस कप्तान हुआ करते थे। उन दिनों मोहंती जी ने इंदौर के बड़े अस्पताल में बड़ा सफाई अभियान चलाया था, और चूहों से मुक्त किया था इस पर अपन ने एक रोचक स्टोरी की थी जो स्टोरी के प्रमुख हीरो मोहंती जी को बेहद पसंद आई और उन्होंने तबके उपसंचालक जनसम्पर्क सुरेश तिवारी जी के माध्यम से प्रसन्नता जाहिर की थी अपन ने मज़ाक में तिवारी जी को कह दियाआपके कलेक्टर साब तो अपने को पहचानते नहीं है, वे उन्हें ही जानते हैं जो उनसे आगे बढ़कर हाथ मिलाते हैं।

तिवारी जी ने उन्हें यह बताया होगा सो एक बार जब वे पत्रकारों को बस में लेकर इंदौर भ्रमण पर निकले तो लौटते में सब राजबाड़ा पर वापसी के लिए एकत्र हो गए , मोहंती जी ने सबसे अभिवादन कर बिदाई ली और एकाएक अपने को आवाज़ देकर कहा आइये बंसल जी। मेरे लिए असमंजस की स्थिति हतप्रभ करने वाली भी थी उन्होंने रुस्तमसिंह जी के साथ अपने बीच सरकारी एम्बेसेडर में अपने को बिठवा लिया , अपन सोचते रहे मोहंती जी ये कौनसा और किस तरह का उतारा कर रहे हैं शायद वह तिवारी जी का प्रभाव था , दोनों अधिकारीगण पप्पू भंडारी के अप्सरा होटल तक अपने साथ गए , लेकिन जी छाप मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री पटवा जी अपने पर छोड़ गए वह और कोई नहीं…

अंदाज़ अपना 🖌सुरेंद्र बंसल का पन्ना

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