राजकुमार जैन

“क्रिसमस” संभवतया इस धरती पर सबसे व्यापक रूप से मनाया जाने वाला त्योहार है। यह मंगलमयी और आनंदमयी दोनों ही है। हर साल 25 दिसंबर को लगभग 3 अरब यानि दुनिया की आबादी के 45% लोग बेथलहम में यीशु मसीह के जन्म का जश्न मनाते हैं। इस दिन सभी एक दूसरे को और “मेरी क्रिसमस” कह कर बधाई देते हैं। वैसे तो वैश्विक आबादी के लगभग 31.2% लोग ही ईसाई धर्म का पालन करते है लेकिन उनके अलावा अन्य धर्मों को मनाने वाले लाखों लोग भी क्रिसमस पूरे जोशोखरोश से मनाते हैं।

ईसाइयों के लिए क्रिसमस, या बड़ा दिन, उद्धारकर्ता यीशु मसीह के जन्मदिन के रूप में सबसे पवित्र दिन होता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान ने नासरत के गलील क्षेत्र में रहने वाली कुंवारी मरियम को अपने इकलौते बेटे की मां बनने के लिए चुना था। एक दिन एक स्वर्गदूत ने मरियम को दर्शन देकर उससे कहा कि वह एक विशेष बालक को जन्म देगी जिसका नाम यीशु होगा। इस बच्चे का कोई सांसारिक पिता नहीं होगा। वह परमेश्वर का पुत्र होगा। मरियम की सगाई यूसुफ नाम के एक यहूदी बढ़ई से हुई थी। तत्कालीन रोमन शासक सीज़र ऑगस्टस का फरमान था रोमन शासन के अधीन रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अनिवार्य जनगणना में भाग लेने के लिए अपने गृह नगर में लौटना होगा। यूसुफ चूंकि बेथलहम से था, इसलिए वह गर्भवती मरियम के साथ कई दिनों की कठिन यात्रा कर बेथलहम पहुंचा।

वहाँ पहुंचने पर, उन्होंने पाया कि वहाँ भारी भीड़ जमा थी और सारी सरायेँ खचाखच भरी हुई थी। विश्राम के लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में एक सराय के मालिक बार्थोलोम्यू और उसकी पत्नी अबीगैल ने उन पर दया की और उन्हें अपने अस्तबल में रात काटने को जगह दी। वहाँ मरियम ने परमेश्वर के पुत्र को जन्म दिया। अपने राजा के जन्म पर देवदूत मंगल गीत गाने लगे और आकाश में अद्भुत छटा लिए एक विशेष तारा चमकने लगा। मरियम ने शीशू को कपड़े में लपेट कर चरनी में लेटा दिया। मार्गदर्शक तारे का अनुसरण करते हुए दूर दूर से यात्रा कर लोग शिशु यीशु के दर्शन करने आए, जिनमें पूर्व के तीन विद्वान पुरुष भी शामिल थे, जिन्होंने शिशु राजा को सोना, लोबान और गंधरस के तीन उपहार समर्पित किये।

वर्षों से मनाते हुए, क्रिसमस, यीशु मसीह के जन्म के उत्सव से आगे बढ़ाकर एक व्यापक त्योहार हो गया है। महामारी के कुछ कष्टदायक वर्षों के बाद, हम सभी इस 25 दिसंबर को वर्ष के सबसे शानदार समय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। क्रिसमस खुशी और गर्मजोशी से भरपूर एक ऐसा त्योहार है, जो परिवार के सदस्यों के आपसी प्यार और दोस्तों के साथ की खुशी से भीगा हुआ है। क्रिसमस कई सारी परंपराओं से जुड़ा हुआ है. इस अवसर पर लोग क्रिसमस ट्री को सजाते हैं, कुकीज और केक बनाते हैं। हॉलीडे परेड में भाग लेते हैं। सजावट के लिए लाल, सफ़ेद, सुनहरे और हरे रंग के कपड़ों और अन्य वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता हैं। लाल रंग ईसा मसीह के बलिदान का प्रतीक है, सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है, सुनहरा रंग उपहार का प्रतीक और हरा रंग अनंत और शाश्वत जीवन का प्रतिनिधित्व करता है.

इस आधुनिक युग में, हम क्रिसमस को धर्मनिरपेक्ष आध्यात्मिकता से जोड़कर देखने लगे हैं। एक ऐसा उत्सव जो पारंपरिक रूप से विभिन्न प्रकार की संस्कृतियों द्वारा पल्लवित संस्कार और मान्यताओं द्वारा चिह्नित उत्साह और उमंग के साथ पारिवारिक मौज-मस्ती के रूप में मनाया जाता रहा है। लेकिन आज क्रिसमस को एक धार्मिक त्योहार से आगे बढ़कर बांटने और स्नेह की ऐसी भावना को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए जाना जाता है जिसे समाज पूरे वर्ष याद रखता है। यह अब सभी धर्मों के लोगों द्वारा मनाया जाता है।

उत्सव के अलावा क्रिसमस का दिन आध्यात्मिक जीवन की वास्तविकता का भी प्रतिनिधित्व करता है. कहा जाता है कि यीशु के जन्म से पहले, दुनिया में बहुत अधिक घृणा, लालच और पाखंड था, लेकिन यीशु के जन्म बाद, दुनिया में एक सकारात्मक बदलाव आया जिसने इन सभी बुराइयों को नष्ट कर दिया और विश्व में शांति की स्थापना हुई । हम सभी जानते हैं कि शांति के बिना किसी का अस्तित्व संभव नहीं है। घृणा, संघर्ष, हिंसा और युद्ध जैसे शब्दों की मानवता के धर्म में कोई जगह होनी ही नहीं चाहिए । शायद यही वह वजह है कि क्रिसमस किसी एक देश या राष्ट्र में नहीं, बल्कि दुनियाभर में धूमधाम से मनाया जाता है। आज क्रिसमस जैसे त्योहारों को खुशी, एकजुटता, उदारता और शांति के अवसर के रूप में चित्रित किए जाने की आवश्यकता है।

क्रिसमस पर्व के दौरान चाहे वह लंबे समय से खोए हुए प्यार का फिर से जागना हो या लंबे और दर्दनाक संघर्ष के बाद परिवार के सदस्यों के बीच मेल-मिलाप हो। लोगों को यह विश्वास हो जाता है कि इस समय एक खास तरह का “जादू” अपना असर दिखाता है जो “छुट्टियों के मौसम” के तौर पर जाना जाता है और छुट्टियों का तो कोई धर्म होता नहीं है। सभी को एक खुशगवार क्रिसमस की शुभकामनाएं।