आईआईएम इंदौर-जीआईज़ेड जर्मनी ऑनलाइन कांफ्रेंस की हुई शुरुआत

इंडस्ट्री गेस्ट स्पीकर माधव कल्याण, एमडी और सीईओ, जेपी मॉर्गन चेस बैंक इंडिया ने बैंकिंग क्षेत्र पर COVID के प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महामारी के कारण मांग, आपूर्ति और वित्तीय क्षेत्र में व्यवधान आया है, जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक मंदी आई है।

 इंदौर: जीआईजेड जर्मनी के सहयोग से ‘कोविड 19: सीख और प्रबंधन पर प्रभाव’ विषय पर दो दिवसीय ऑनलाइन कांफ्रेंस का आयोजन कर रहा है। यह कांफ्रेंस शिक्षाविदों, चिकित्सकों, उद्योगपतियों और विद्यार्थियों के लिए वैश्विक महामारी के प्रबंधन में मुद्दों, चुनौतियों और प्रगति पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करती है। कांफ्रेंस का उद्घाटन 16 अप्रैल, 2022 को प्रो. हिमाँशु राय, निदेशक, आईआईएम इंदौर और श्री अमित पालीवाल, कार्यक्रम निदेशक, जीआईजेड इंडिया द्वारा ऑनलाइन किया गया। प्रो. मीत वच्छराजानी, कांफ्रेंस कोऑर्डिनेटर; प्रो. प्रीतम रंजन, डीन – रिसर्च, आईआईएम इंदौर; प्रो. अभिषेक मिश्रा, फैकल्टी, आईआईएम इंदौर; प्रो. सुबीन सुधीर, चेयर – एग्जीक्यूटिव एजुकेशन, आईआईएम इंदौर, और प्रो. सुशांत मिश्रा; फैकल्टी, आईआईएम बैंगलोर भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

अपने स्वागत भाषण में, प्रो. हिमाँशु राय ने बताया कि कैसे COVID महामारी ने हमें अपनी दृष्टि (विज़न), आत्मनिरीक्षण (इंट्रोस्पेक्शन) और खोज (डिस्कवरी) करने का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संगठन की तरह, हम मनुष्यों को भी अपने लिए एक दृष्टि तय करनी चाहिए। ‘दृष्टि हमें अपने अस्तित्व के उद्देश्य की पहचान कराती है। शिक्षकों और शोधार्थियों के रूप में, हमें अपना उद्देश्य खोजने और फिर उसे प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है। इस प्रकार, जब आप इस कांफ्रेंस में भाग ले रहे हैं, तो इस अवसर का उपयोग अपना नेटवर्क बनाने और यह तय करने के लिए करें कि आपका लक्ष्य क्या है ‘, उन्होंने समझाया। उन्होंने कहा कि शिक्षक होने से व्यक्ति स्वाभाविक तौर पर एक लीडर भी बन जाता है। ‘आपके विद्यार्थी निश्चित रूप से आपके कार्यों का अनुसरण करेंगे, क्योंकि वे आपसे ही सीखते हैं। सही मार्ग चुनकर और सही समय पर सही निर्णय लेकर उनके लिए एक मिसाल कायम करें। इस व्यस्त जीवन में कुछ क्षण विराम लें, आत्मनिरीक्षण करें और फिर अपना लक्ष्य तय करें’, उन्होंने कहा। उन्होंने प्रतिभागियों को सलाह दी कि वे पद के आधार पर अपने आत्म-मूल्य को न मापें। ‘आपकी पहचान यह है कि आप कौन हैं और आप किसके बारे में भावुक हैं। किसी पद को धारण करने की अपनी सतही पहचान पर ध्यान न दें – अन्यथा एक बार जब आप इसे खो देते हैं, तो आपकी पहचान भी खो जाएगी’, उन्होंने कहा।

अमित पालीवाल ने आईआईएम इंदौर के साथ सहयोग करने पर अपनी खुशी साझा की। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल दुनिया के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रहे हैं, खासकर भारत के लिए। लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, और आर्थिक क्षेत्रों को पहले की तरह व्यवधानों का सामना करना पड़ा है। जो उद्योग आमतौर पर प्रभावित नहीं थे, जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा, ने भी अपने काम करने के तरीकों में बड़े पैमाने पर बदलाव देखा। ‘आईआईएम इंदौर के साथ इस फलदायी सहयोग ने हमें शिक्षाविदों, उद्योगपतियों और शोधकर्ताओं को एक साथ आने और अपने विचारों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करने का अवसर प्रदान किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि भारत कैसे महामारी के बाद के युग में और भी मजबूत हो सकता है’, उन्होंने कहा।

इंडस्ट्री गेस्ट स्पीकर माधव कल्याण, एमडी और सीईओ, जेपी मॉर्गन चेस बैंक इंडिया ने बैंकिंग क्षेत्र पर COVID के प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महामारी के कारण मांग, आपूर्ति और वित्तीय क्षेत्र में व्यवधान आया है, जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक मंदी आई है। ‘पांच प्रमुख दीर्घकालिक प्रभाव जो हम महामारी के बाद के भारत में प्रकट कर सकते हैं, वे हैं कम ब्याज दर वाला वातावरण, वित्तीय सेवाओं का त्वरित डिजिटलीकरण, ग्राहक-बैंक संबंधों और संचार का धीमा होना, लेनदेन के डिजिटलीकरण को पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना, बैंकों की बैलेंस शीट और विनियमन में कमजोरी। ‘महंगाई पिछले कुछ दशकों से एक सतत समस्या रही है। हालाँकि, महामारी के दौरान, हमने आर्थिक क्षेत्र में मांग-आपूर्ति श्रृंखला में भी समस्याएं देखीं। सख्त सोशल डिस्टेंसिंग मानदंडों ने बैंकों को अपने ग्राहक संबंधों और प्रतिधारण को मजबूत करते हुए अपनी नीतियों और नेटवर्क के पुनर्गठन के लिए प्रोत्साहित किया है। डिजिटल और कैशलेस भुगतान प्रणाली शुरू में बैंकों द्वारा निभाई जाने वाली मध्यवर्ती भूमिका के लिए एक खतरा बन गई; हालांकि, सरकार और आरबीआई द्वारा नई नीतियों के साथ, बैंक एक बार फिर से सशक्त हो रहे हैं ‘, उन्होंने कहा। उन्होंने कहा कि कम आर्थिक गतिविधि और आपूर्ति-श्रृंखला की अड़चनें ऐसी चुनौतियाँ हैं जिन्हें हल करने की आवश्यकता है। ‘महामारी ने साबित कर दिया है कि भले ही दूसरी लहर भयावह थी, लेकिन हमारी आर्थिक प्रणाली लचीली और मजबूत थी और अब पुनः सुदृढ़ होने के रास्ते पर है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम इस महामारी के बाद के परिदृश्य को वर्तमान स्थिति को और मजबूत करने के अवसर के रूप में लें।

दिन का समापन विभिन्न ट्रैकों पर पेपर प्रेजेंटेशन के साथ हुआ जो कल भी जारी रहेगा। ‘महामारी के दौरान शिक्षकों के सामने आने वाली चुनौतियाँ’ विषय पर एक पैनल चर्चा भी होगी। कल समापन सत्र के दौरान तीन सर्वश्रेष्ठ पेपर पुरस्कारों की भी घोषणा की जाएगी।