शनि की साढ़ेसाती को दूर करना है तो करें ये काम

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हर व्यक्ति के मन में शनि का नाम आते ही भय बैठ जाता हैं ऐसी मान्यता हैं कि शनिदेव को महादेव ने न्याय का देवता बनाया और शनिदेव ही कलियुग में व्यक्ति के पापों का हिसाब किताब करते हैं उन्हें उनके पापों के हिसाब से सजा भी देते हैं मगर ज्योतिष कहते हैं कि पाप कर्मों से तौबा कर लेने और फिर शनिदेव के मंत्रों के जाप से उन्हें प्रसन्न किया जा सकता हैं। बता दे, शनि के बारे में बुरा वही लोग कहते हैं जो उनसे पीड़ित हैं।

लेकिन वो ये नहीं समझते कि शनि उन्हीं लोगों को पीड़ा देते हैं। जिन्होंने अपने इस जीवन या उससे पहले के जीवन में बुरे कर्म किए होते हैं। ऐसे में शनि आपके ही कर्मों का फल देते हैं। शनि धन प्राप्ति का कारक हैं। शनि की महादशा, साढ़ेसाती और ढैया के कालखंड में आने वाली कठिनाइयों से बचने तथा शनि देव के प्रकोप से बचने का सबसे सरल उपाय शनि भर्या स्तोत्र है। इसकी साधना किसी भी शनिवार से शुरू की जा सकती है। इस मंत्र से प्रसन्न करे शनिदेव को “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”

शनि देव की पूजा

शास्त्रों के अनुसार शनिदेव की पूजा विधिपूर्वक करने से उसका लाभ मिलता है। साथ ही शनि दोषों से मुक्ति मिलती है। शनिवार के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त हो शनि देव का व्रत और पूजा शुरू करनी चाहिए। पूजा शनि देव मंदिर में भी जाकर की जा सकती है। पूजा काला तिल, काला वस्त्र, लोहा, तेल और काली मूंग से ही करना चाहिए। शनि स्त्रोत का पाठ करके इन्हीं वस्तुओ का दान भी करना चाहिए। ये चीजे शनिदेव को विशेष रूप से प्रिय है।

भूल कर भी ना करें ये काम

गलती से भी शनिवार के दिन सरसों का तेल कभी नहीं खरीदना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार शनिवार के दिन तेल व सरसों का दान किया जाता है। इसलिए सरसों का तेल खरीदना शुभ नहीं माना जाता। शनिवार को कुछ लोग शनि मंदिर के सामने दुकान लगाए लोगों से तेल का दीपक खरीदते हैं और उसे शनिदेव के आगे जलाकर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। लेकिन जाने-अंजाने में ही सही लेकिन शनिवार को सरसों का तेल खरीद लेते हैं। जो की हमारे लिए शुभ नहीं होता और हमारे लिए परेशानी का कारण बन सकता है। यदि आपको मंदिर में दीपक लगाना है तो घर से ही तेल का दीपक लेकर जाएं।