मैं दो महीने पहले स्वर्गीय हो गया होता…..

ठीक दो महीने पहले (4नवंबर 21)हार्ट अटैक के चलते मरणासन्न हालत में बॉंबे हॉस्पिटल में भर्ती हुआ था।5 को लाइफ सेविंग इंजेक्शन से जान में जान आई।

कीर्ति राणा

ठीक दो महीने पहले (4नवंबर 21)हार्ट अटैक के चलते मरणासन्न हालत में बॉंबे हॉस्पिटल में भर्ती हुआ था।5 को लाइफ सेविंग इंजेक्शन से जान में जान आई। मौत तो उसी दिन हो जाती में बच गया तो महाकाल की कृपा और कुछ जिन मित्रों के लिए जाने-अंजाने अच्छे काम किए होंगे उन सब की दुआओं से।

आइए आप सब भी जान लीजिए वो सारी कहानी, इसलिए कि मेरे जैसी नासमझी आप ना करें।मेडिकल फील्ड से नावाकिफ मित्रों को भी शायद इस पूरी सत्यकथा से दिल की बीमारी-उपचार प्रक्रिया को समझने में मदद मिल जाए।

दीवाली की सुबह से ही दर्द हो रहा था…..

दीवाल की सुबह से ही बांए हाथ और सीने में हल्का-हल्का दर्द था, जैसी की हम सब की आदत है मैंने भी मान लिया कि टू वीलर चलाने से या सोने में हाथ दब जाने से दर्द हो रहा है। मेरी लापरवाही यथावत थी और दर्द था कि जोर पकड़ता जा रहा था। दोपहर 12 बजे “प्रजातंत्र” में दीपावली पूजन का मुहूर्त था। तैयार होकर ऑफिस भी पहुंच गया, दर्द यथावत था। ऑफिस के साथियों से भी इस दर्द का जिक्र नहीं किया।

पंडित जी का इंतजार करते रहे, पता चला लेट आएंगे, दोपहर 2.15 के करीब मैं ऑफिस से चुपचाप निकला घर के लिए। लिफ्ट से नीचे पहुंचा ही था कि साथी-मित्र एमएल चौहान ने मोबाइल पर सूचना दी पंडित जी आ गए हैं, आप भी आ जाओ।

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पूजा का सामान खरीदते हुए घर पहुंचा

लिफ्ट से वापस ऑफिस पहुंचा, पूजा हुई, टीम प्रजातंत्र के साथियों के साथ ग्रुप फोटो भी हुए। लगभग 4.30 बजे नीचे आया घर जाने के लिए ।श्रीमती जी को फोन लगाकर पूछ लिया कुछ लाना तो नहीं है। पूजन सामग्री, अन्नकूट के लिए दही-छाछ आदि खरीदते हुए घर पहुंचा, दर्द कुछ तेज हो चला था।5.30 बजे के करीब घर पहुंचा। चाय पीने की इच्छा हुई, हमेशा की तरह खुद ही बना रहा था कि तेज गर्मी लगने लगी, हल्का सा पसीना महसूस हुआ। श्रीमती से पूछा क्या तुम्हें भी गर्मी लग रही, जवाब मिला नहीं। मैं किचन से हॉल में आकर बैठ गया, फुल स्पीड पर पंखा चला दिया, कुछ राहत सी महसूस हुई तो सोफे पर ही लेट गया, आंख लग गई। बाएं हाथ और सीने में बढ़ते दर्द के कारण कुछ देर बाद ही नींद खुल गई।

मित्रों के फोन बंद, डॉक्टर भी नहीं मिले

श्रीमती से कहा, लाला (पुत्र) को बुलाओ, किसी डॉक्टर को दिखाना पड़ेगा। इस बीच डॉ विनोद भंडारी, मित्र मनोहर लिंबोदिया और सुक्का भाटिया (होटल दिव्कोय पैलेस)को फोन भी लगाए लेकिन किसी से बात नहीं हो सकी।लाला के साथ स्कूटर से ही निकला, सोचा था महालक्ष्मी नगर रोड पर तीन-चार डॉक्टर हैं, कोई तो मिल ही जाएगा।दीपावली वाला दिन होने से सारे क्लिनिक बंद थे। लाला ने कहा भंडारी हॉस्पिटल चलते हैं।

हम बॉंबे हॉस्पिटल चौराहा के निकट पहुंचे ही थे कि मैंने कहा, यही दिखा देते हैं, त्यौहार का दिन है, ट्रैफिक-जाम मिलेगा। उसने टू वीलर बॉंबे हॉस्पिटल की तरफ मोड़ दी। केजुअल्टी में तैनात डॉक्टर को परेशानी बताई, उन्होंने ईसीजी करने के बाद, कार्डियक प्रोफाइल टेस्ट करवाने को कहा। (इस एक ब्लड टेस्ट के जरिए ये पता लग सकता है कि मरीज की आर्टरी में रुकावट होनी शुरू हो गई है और आने वाले समय में उसे हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। हमारे शरीर में दो बायोमार्कर सीसटेटिन सी और स्माल डेंस का डॉक्टरों ने पता लगाया है जिसकी ज्यादा मात्रा का सीधा संबंध कोरोनरी आर्टरी में रुकावट से है।)

हार्ट पर असर बताया, फिर भी हम घर आ गए

लेब में पहुंचे, ब्लड सेंपल दिया। टेक्निशियन का कहना था फाइनल रिपोर्ट तो कल मिलेगी पर एक घंटे बाद प्रिमलरी रिपोर्ट बता दूंगा। इस बीच मैंने हेमंत शर्मा (एमडी प्रजातंत्र) को और लाला ने मीना बुआ को सूचित कर दिया था। कुछ ही देर में भांजे देवाशीष के साथ वह भी पहुंच गई।एक घंटे बाद प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक लेब टेक्निशियन ने हार्ट पर 8 फीसदी असर होने का जिक्र करते हुए कहा आप चाहें तो भर्ती हो जाएं, किसी अन्य डॉक्टर को दिखा दें या अभी घर चले जाएं।कल फायनल रिपोर्ट के साथ यहां दिखा देना। इस प्रारंभिक रिपोर्ट से केजुअल्टी डॉक्टर को अवगत कराए बिना घर आ गए कि दीपावली पूजन कर लेंगे।

मौत नजदीक जान गंगा जल भी पी लिया

रात 10.30 के करीब पूजन किया, तुलसी नगर स्थित मंदिर में भी दीपक रखने गए।लौटते में बेटी तनु से भी वीडियो कॉल पर बात कर ली। रात 11.30 के करीब दो पराठे, आलू की सब्जी, प्रसाद आदि भी खा लिया। लगातार काम से थकी हारी श्रीमती की तो आंख लग गई। बढ़ते दर्द और परेशानी के कारण मेरी आंखों से नींद गायब थी। पलंग से धीरे से उठा कि कहीं श्रीमती की नींद ना खुल जाए।हॉल में और बरामदे में टहलता रहा।गर्म पानी कर एक गिलास पी लिया, फिर खयाल आया कि बीपी ना बढ़ गया हो, नमक-शकर का पानी भी पी लिया।रात 4.30 के करीब दर्द असहनीय होने और जान ना बचने की आशंका के चलते पूजा घर में रखा गंगाजल भी तीन घूंट पी लिया, महामृत्युंजय मंत्र के जाप के साथ महाकाल को भी याद करता रहा।

अंतत: श्रीमती जी को जगाया और कहा इस हाथ पर आयोडेक्स लगा कर कपड़ा बांध दो, दर्द इतना तेज था कि कहने लगा मेरा हाथ मोड़ दो।सीने में दर्द और भारीपन के चलते कहीं गैस ना बढ़ गई हो, दो बार इनो भी पी लिया।5 नवंबर की सुबह 5.45 के करीब लाला को कहा कार से चलते हैं बॉंबे हॉस्पिटल इस बीच मीना और बड़ी भाभी को उसने खबर कर दी थी।

तुरंत आईसीयू में एडमिट कर लिया

अस्पताल में चेकअप के बाद तुरंत आईसीयू में एडमिट करने के साथ ही डॉक्टरों ने परिजनों को बता दिया कि हार्ट प्राब्लम है। डॉक्टर मुझ से जानकारी ले रहे थे और मैं बता रहा था कि बाएं हाथ और सीने में दर्द भयंकर है।कुछ ही देर बाद उन्होंने लाईफ सेविंग ड्रग (इंजेक्शन) लगा दिया। सुबह 8.30 के करीब मेरा दर्द रफू चक्कर हो गया था, सब कुछ नार्मल लग रहा था।बाद में डॉक्टरों ने परिजनों से कहा इनकी एंजियोग्राफी करना पड़ेगी।

बॉंबे हॉस्पिटल इंदौर के नामचीन और 25 वर्षों के अनुभवी इंटरवेंशनल कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ इदरीस एहमद खान ने एंजियोग्राफी की। इस की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि एकाधिक रक्त धमनियों में रुकावट है और ऐसी स्थिति में एंजियोप्लास्टी नहीं की जा सकती है।

यह है एंजियोग्राफी की प्रक्रिया

रक्त वाहिनियों के स्वास्थ्य और उनमें रक्त प्रवाह की जांच करने के लिए एंजियोग्राफी की जाती है। कुछ रोगों में उपचार की व्यवस्था करने के लिए भी एंजियोग्राफी का प्रयोग किया जा सकता। डॉ इदरीस खान एंजियोग्राफी की रिपोर्ट के आधार पर परिजनों को स्पष्ट कर चुके थे कि ब्लॉकेज अधिक होने से एंजियोप्लास्टी नहीं की जा सकती।हां स्टेंट डाला जा सकता है लेकिन स्टेंट की सफलता को लेकर भी वे साफ कह चुके थे कि चलने को स्टेंट लंबे समय चल सकता है लेकिन साल-छह महीने बाद ही स्टेंट निष्प्रभावी हो जाए तब अंतिम उपचार बायपास सर्जरी ही रहेगा।ऐसे में उन्होंने बायपास सर्जरी को ही बेहतर विकल्प बताया।

इस तरह की जाती है एंजियोप्लास्टी

यह एक ऐसी सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों तक ब्लड सप्लाई करने वाली रक्त वाहिकाओं को खोला जाता है. मेडिकल भाषा में इन रक्त वाहिकाओं को कोरोनरी आर्टरीज़ कहते हैं. डॉक्टर अक्सर दिल का दौरा या स्ट्रोक जैसी समस्याओं के बाद एंजियोप्लास्टी का सहारा लेते हैं।

डॉ इदरीस खान के इस सुझाव के बाद परिजनों ने उनसे ही पूछ लिया कि बायपास सर्जरी कराना कहां बेहतर रहेगा। उन्होंने अपने अस्पताल के डॉक्टरों से कराने के साथ ही मुंबई, अहमदाबाद, दिल्ली आदि के विकल्प बता दिए।

दिल्ली में बायपास सर्जरी के लिए भतीजे हिमांशु शर्मा
(बीएसएफ) ने मेदांता अस्पताल में ऑपरेशन के लिए लाने की सलाह दी। बेटी-दामाद (तनु-राहुल व्यास) का कहना था दिल्ली लाते हैं तो हम भी देखभाल कर लेंगे।सेकंड ओपिनियन के लिए डॉ मनीष पोरवाल को सारी रिपोर्ट दिखाई।उनका कहना था बायपास सर्जरी तो जरूरी है। आप यदि दिल्ली या अन्यत्र कहीं ले जाना चाहें तो ले जा सकते हैं, सफर हवाई जहाज से ही करना होगा लेकिन इस सफर के दौरान यदि कोई परेशानी हो गई तो..? (बाकी सत्यकथा कल पढ़िए)